ट्रंप के वीजा प्लान पर कोर्ट का ब्रेक: 75 देशों के नागरिकों पर पड़ना था असर

ट्रंप के वीजा प्लान पर कोर्ट का ब्रेक: 75 देशों के नागरिकों पर पड़ना था असर
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न्यूयोर्क, 24 अगस्त । अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई एक विवादित अप्रवासन (इमिग्रेशन) नीति को अदालत से बड़ा झटका लगा है। न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय न्यायाधीश जैनेट वर्गास (Jeannette Vargas) ने शुक्रवार को दिए अपने फैसले में प्रशासन के उस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया, जिसके तहत 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट (प्रवासी) वीजा प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी।

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अदालत ने नीति को बताया गैर-कानूनी

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न्यायाधीश जैनेट वर्गास ने इस प्रतिबंध नीति को कानून के खिलाफ (Contrary to law) करार दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि अमेरिकी विदेश विभाग और विदेश मंत्री ने इस व्यवस्था को लागू करते हुए अपनी कानूनी सीमाओं का उल्लंघन किया है। अदालत के अनुसार, अमेरिकी कानून के तहत वीजा आवेदन को खारिज करने का अधिकार काउंसलर अधिकारियों के पास है, और पूरे देश के आधार पर एकतरफा प्रतिबंध लगाना नियमों के विपरीत है।

75 देशों के नागरिकों की इमिग्रेंट वीजा प्रोसेसिंग पर लगी थी रोक

प्रशासन ने यह नीति इस तर्क के साथ लागू की थी कि इन 75 देशों से आने वाले लोग अमेरिका में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं (Public Charge) पर बोझ बन सकते हैं। इस नीति के दायरे में अफगानिस्तान, ब्राजील, मिस्र, ईरान, इराक, नाइजीरिया, सोमालिया, थाईलैंड और यमन सहित 75 देशों के नागरिक शामिल थे। यह रोक मुख्य रूप से स्थायी निवास (इमिग्रेंट वीजा) चाहने वालों पर थी, जबकि गैर-इमिग्रेंट (जैसे टूरिस्ट या स्टूडेंट) वीजा इससे प्रभावित नहीं थे।

मूल देश के आधार पर भेदभाव को ठहराया अनुचित

न्यायाधीश वर्गास ने स्पष्ट किया कि केवल किसी देश का नागरिक होने के आधार पर योग्य आवेदकों को वीजा देने से मना करना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और अनुचित है। यदि कोई आवेदक सभी कानूनी शर्तें और वित्तीय योग्यताएं पूरी करता है, तब भी महज उसके मूल देश की वजह से वीजा रोकना गैर-कानूनी है। अदालत के इस आदेश के बाद इस नीति के तहत रोके गए सभी वीजा इनकार रद्द हो गए हैं और व्यक्तिगत योग्यता के आधार पर केस देखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अमेरिकी सरकार के पास इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प खुला है।