पुष्करणा दिवस और राष्ट्रीय खेल दिवस पर संगोष्ठी आयोजित
पुष्करणा दिवस और राष्ट्रीय खेल दिवस पर संगोष्ठी आयोजित


- खेल हमें अनुशासित बनाते हैं और कला संवेदनशील’
बीकानेर , 27 अगस्त । द पुष्करणाज फाउंडेशन द्वारा पुष्करणा दिवस एवं राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। नत्थूसर गेट के बाहर लक्ष्मीनारायण सृजन सदन में आयोजित यह संगोष्ठी ‘खेल, कला-संस्कृति और संस्थान’ विषय पर केंद्रित रही।


संस्कृति और खेल ही समाज का असली आधार: वक्ता


समारोह में अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान विमल किशोर व्यास द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज, कला और खेल के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए:
संस्कृति और संस्कार (कमल रंगा): वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि पुष्करणा समाज की पहचान उसकी समृद्ध परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत से है। उन्होंने परंपराओं को नई पीढ़ी तक आधुनिक माध्यमों से पहुंचाने का आह्वान किया।
खेल और अनुशासन (कृष्णचन्द पुरोहित): अंतरराष्ट्रीय लोक कला संस्कृति विशेषज्ञ एवं खेल निदेशक कृष्णचन्द पुरोहित ने कहा कि खेल केवल पुरस्कार पाने का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, टीम भावना और धैर्य की शिक्षा देते हैं। उन्होंने कहा, “खेल मैदान जीवन का एक छोटा-सा विद्यालय है, जो जीत में अहंकार न करने और हार से सीख लेने का पाठ पढ़ाता है।”
संस्थागत भूमिका (श्याम सुन्दर चूरा): मुख्य अतिथि व वरिष्ठ कोच श्याम सुन्दर चूरा ने कहा कि द पुष्करणाज फाउंडेशन जैसी संस्थाओं को युवा ऊर्जा और वरिष्ठों के अनुभव के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करना चाहिए।
सामाजिक चेतना (गोपीकिसन छंगाणी): कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गोपीकिसन छंगाणी ने कहा कि यह अवसर सामाजिक विरासत, कला-संस्कृति और संस्थागत एकता पर गहन विचार करने का है।
गणमान्यजनों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन राजेश रंगा ने किया, जबकि अंत में मोहित पुरोहित ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मरूधर बोहरा, शरद जोशी, अभिमन्यु जोशी, नमन जोशी, राधेरंजन उपाध्याय, शशिमोहन पुरोहित, धर्मेंन्द्र छंगाणी, मदनमोहन ओझा, मनमोहन पालीवाल, हरिनारायण आचार्य, महेन्द्र आचार्य, गौरी शंकर व्यास, रोहित पुरोहित, राकेश किराडू, श्यामसुन्दर किराडू, नन्द किशोर रंगा, अशोक उपाध्याय, इन्द्रकुमार जोशी सहित अनेक मातृशक्ति, युवा और समाज के वरिष्ठजन उपस्थित रहे।
