मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति और परीक्षा तनाव पर विद्यार्थियों को किया जागरूक
मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति और परीक्षा तनाव पर विद्यार्थियों को किया जागरूक

- रामपुरिया कॉलेज व निजी शिक्षण संस्थानों में आयोजित हुए जागरूकता सत्र; QPR मॉडल और गेटकीपर ट्रेनिंग से किया प्रशिक्षित
बीकानेर, 08 अक्टूबर । पीबीएम अस्पताल के मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग तथा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम इकाई, बीकानेर के तत्वावधान में मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति और परीक्षा तनाव के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुवार को शहर में विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया।


- रामपुरिया कॉलेज में QPR मॉडल और तनाव प्रबंधन पर सत्र
अभियान की पहली गतिविधि के तहत सेठ तोलाराम रामपुरिया जैन कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। सीनियर रेजिडेंट डॉ. अर्चना अग्रवाल ने QPR मॉडल तथा “I Support My Friend” मॉड्यूल के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्महत्या के चेतावनी संकेतों की पहचान करने, संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने और मानसिक रूप से परेशान मित्रों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में प्रशिक्षित किया।


इसी क्रम में सीनियर रेजिडेंट डॉ. मांगीलाल ने नशे के शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए समय पर नशा मुक्ति परामर्श लेने पर जोर दिया। जूनियर रेजिडेंट डॉ. अक्षय कुमार झा ने विद्यार्थियों को परीक्षा तनाव व चिंता से निपटने के लिए समय प्रबंधन, पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। इस अवसर पर जागरूकता पोस्टर का विमोचन भी किया गया।
- निजी संस्थान में गेटकीपर ट्रेनिंग और तनाव प्रबंधन
दूसरी गतिविधि के तहत एक निजी शिक्षण संस्थान में परीक्षा तनाव व ‘गेटकीपर ट्रेनिंग’ पर विशेष सत्र आयोजित हुआ। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट अंजू ठकराल, डॉ. अर्चना अग्रवाल तथा जिला विधिक सलाहकार मित्र प्रतिमा तिवारी ने विद्यार्थियों को तनाव के शुरुआती लक्षणों की पहचान, दैनिक कार्यक्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव और सही समय पर विशेषज्ञ सहायता लेने की आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताया।
- कलेक्टरेट परिसर में नुक्कड़ नाटक से दिया सामाजिक संदेश
अभियान की तीसरी गतिविधि के रूप में शाम को कलेक्टरेट परिसर में मेडिकल विद्यार्थियों द्वारा एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया जाएगा। इसके माध्यम से आमजन और विद्यार्थियों को “मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है” का संदेश देते हुए मानसिक भ्रांतियों व सामाजिक कलंक को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
