बीकानेर में कवयित्री मीनाक्षी जिजीविषा सम्मानित
बीकानेर में कवयित्री मीनाक्षी जिजीविषा सम्मानित

- सुदर्शन कला दीर्घा में मिला ‘अज़ीज़ आज़ाद शान-ए-अदब अवार्ड’, गूंजी ग़ज़लें
बीकानेर, 17 अक्टूबर। नागरी भंडार स्थित सुदर्शन कला दीर्घा में अज़ीज़ आज़ाद लिटरेरी सोसायटी (आल्स) की ओर से आयोजित एक गरिमामयी समारोह में फरीदाबाद से पधारी प्रख्यात कवयित्री एवं शायरा मीनाक्षी जिजीविषा को अज़ीज़ आज़ाद स्मृति ‘शान-ए-अदब’ अवार्ड से सम्मानित किया गया।


समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि व कहानीकार नवनीत पांडे ने कहा कि मीनाक्षी जिजीविषा की रचनाएं मानव मन के महीन जज़्बात को बेहद खूबसूरती से आईने की तरह सामने रखती हैं। मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवयित्री संगीता सेठी ने कहा कि उनकी ग़ज़लें मन के अनकहे एहसासों को शब्द देने का कार्य करती हैं। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ शायर ज़ाकिर अदीब ने कहा कि जज़्बात को भाषा में ढालकर शायरी के रूप में कहने का हुनर चुनिंदा लोगों के पास होता है और मीनाक्षी उन्हीं में से एक हैं। आल्स के सचिव इरशाद अज़ीज़ ने स्वागत उद्बोधन देते हुए उनके अब तक के साहित्यिक सफर पर प्रकाश डाला।


इस अवसर पर सम्मानित होने के बाद अभिभूत मीनाक्षी जिजीविषा ने अपनी प्रसिद्ध ग़ज़लों ‘उससे अपना दुख कह कर के रो लेती हूँ/ घर में जो पापा की टोपी रखी है’ और ‘काश बदल पाऊं मैं दुनिया…’ का सस्वर पाठ कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम के दौरान श्रीमती शबनम इरशाद, ज़ोया फातिमा, सुशीला ओझा, मनीषा आर्य सोनी और सीमा भाटी सहित अतिथियों ने उन्हें ‘शान-ए-अदब’ अवार्ड प्रदान किया। वरिष्ठ रंगकर्मी रामसहाय हर्ष ने हरीश बी. शर्मा द्वारा लिखित अभिनंदन पत्र पढ़ा, जबकि संजय आचार्य ‘वरुण’ ने अज़ीज़ आज़ाद के व्यक्तित्व पर विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि आनंद मस्ताना ने किया, जिसमें शहर के अनेक साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

