स्कूल में खेलते वक्त 9 साल की मासूम की मौत; 4 माह पहले भाई ने भी इसी तरह तोड़ा था दम

स्कूल में खेलते वक्त 9 साल की मासूम की मौत; 4 माह पहले भाई ने भी इसी तरह तोड़ा था दम
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quicjZaps 15 sept 2025
  • नागौर में रूह कंपा देने वाली त्रासदी

नागौर, 27 फरवरी। राजस्थान के नागौर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि देशभर के अभिभावकों को गहरे खौफ में डाल दिया है। गोटन कस्बे के एक इंटरनेशनल स्कूल में महज 9 साल की छात्रा की हार्ट अटैक (हृदय गति रुकने) से मौत हो गई। सबसे हैरान और विचलित करने वाली बात यह है कि ठीक चार महीने पहले इस बच्ची के सगे भाई की भी इसी रहस्यमयी तरीके से अचानक मौत हो गई थी।

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प्रार्थना सभा के दौरान 7 मिनट में थम गईं सांसें
यह विचलित कर देने वाली घटना 23 फरवरी की सुबह करीब 7:48 बजे घटी। स्कूल में सुबह की प्रार्थना सभा (असेंबली) के लिए बच्चे ग्राउंड में एकत्र हो रहे थे।

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अचानक मौत का मंजर: सोशल मीडिया पर वायरल हुए सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि 9 वर्षीय मासूम अन्य बच्चों के साथ सामान्य रूप से चल रही थी, तभी अचानक वह जमीन पर गिर पड़ी।

7 मिनट का संघर्ष: स्कूल स्टाफ और मौजूद लोग तुरंत बच्ची की ओर भागे और उसे संभालने की कोशिश की, लेकिन गिरने के महज 7 मिनट के भीतर ही मासूम की सांसें टूट गईं। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

एक ही परिवार पर दुखों का पहाड़: भाई की भी हुई थी ऐसी ही मौत
इस घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है क्योंकि पीड़ित परिवार के लिए यह दूसरी बड़ी त्रासदी है।

इतिहास का दोहराव: परिजनों के अनुसार, मृतक छात्रा के सगे भाई की भी करीब चार महीने पहले बिल्कुल इसी तरह अचानक मौत हो गई थी।

जेनेटिक आशंका: एक ही परिवार के दो बच्चों की इस तरह अचानक मौत होने के बाद चिकित्सा विशेषज्ञ इसे किसी जेनेटिक हृदय रोग (Genetic Heart Condition) या ‘सडन कार्डियक अरेस्ट’ से जोड़कर देख रहे हैं।

पैरेंट्स में डर का माहौल: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्कूलों में बच्चों की अचानक गिरकर मौत होने की बढ़ती घटनाओं ने स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि अगर बच्चों में सांस फूलने, थकान या सीने में भारीपन की शिकायत हो, तो उसे नजरअंदाज न करें। साथ ही, स्कूलों में ‘सीपीआर’ (CPR) जैसी आपातकालीन जीवन रक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए।

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