बसंती रंग में रंगे बाबा श्याम; खाटू श्याम मंदिर में सात तरह के विदेशी फूलों से दिव्य श्रृंगार, साल में एक बार होने वाला वस्त्र परिवर्तन संपन्न

बसंती रंग में रंगे बाबा श्याम
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बीकानेर, 23 जनवरी। जयपुर रोड स्थित खाटू श्याम मंदिर में आज बसंत पंचमी का पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर बाबा श्याम का अलौकिक श्रृंगार किया गया और साल में केवल एक बार होने वाली वस्त्र परिवर्तन की परंपरा निभाई गई। पूरा मंदिर परिसर पीताम्बरी आभा से सराबोर नजर आया, जिसे देखने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

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दिल्ली के सात प्रकार के पुष्पों से सजा दरबार
बाबा का दिव्य श्रृंगार मुख्य पुजारी किशन शर्मा एवं चेतन शर्मा द्वारा किया गया। इस बार बाबा के दरबार को महकाने के लिए विशेष रूप से दिल्ली से सात प्रकार के चुनिंदा पुष्प मंगवाए गए थे। इनमें आर्किड, गेंदा, गुलदावरी, बंगलौरी बटन, डेज़ी, कुसुम्बी और खास पीले गुलाब शामिल थे। इन फूलों की खुशबू और बसंती रंग ने मंदिर के वातावरण को वैकुंठ जैसा आनंदमयी बना दिया।

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वर्ष में एक बार होने वाली ‘वस्त्र परिवर्तन’ परंपरा
मंदिर की परंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी का दिन बेहद खास होता है क्योंकि इसी दिन बाबा श्याम के वस्त्र विधिवत बदले जाते हैं। खास बात यह है कि आज धारण किए गए नए वस्त्रों में ही बाबा पूरे वर्ष दर्शन देंगे। परंपरा का निर्वहन करते हुए पुराने वस्त्रों को भक्तों में प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा को चंदन, इत्र और पीले गुलाब अर्पित कर खुशहाली की कामना की।

श्रद्धालुओं ने लगाई अर्जी, पीतांबरी का हुआ वितरण
सुबह से ही मंदिर में ‘श्याम प्यारे’ के जयकारे गूंजने लगे। भक्तों ने नारियल के साथ अपनी मनोकामनाओं की पर्चियां बांधकर बाबा के चरणों में अर्जी लगाई। सुरेश चंद्र भसीन, ओम जिंदल और ब्रजमोहन जिंदल के नेतृत्व में व्यवस्थाओं को सुचारू रखा गया। श्याम जी सेवढ़ा, दीपक, संजय और जीतू सहित अन्य सेवादारों ने भीड़ नियंत्रण और प्रसाद वितरण में सहयोग किया। मुख्य पुजारियों द्वारा भक्तों को विशेष ‘पीतांबरी’ का वितरण भी किया गया।

भक्ति संगीत से सराबोर रहा माहौल
दिनभर चले इस आयोजन में स्थानीय भजन गायकों ने बाबा की महिमा का गुणगान किया। ट्रस्ट के सदस्यों की उपस्थिति में महाआरती का आयोजन हुआ और उसके पश्चात श्रद्धालुओं को पीला प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, बसंत पंचमी पर बाबा का यह ‘पीला श्रृंगार’ सुख-समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

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