बीकानेर के सरकारी समाचार
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- एक से सात अक्टूबर तक मनाया जाएगा समाज कल्याण सप्ताह, होंगे विभिन्न आयोजन
बीकानेर, 30 सितम्बर। जिले में 1 से 7 अक्टूबर तक समाज कल्याण सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित, गरीब, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, वयोवृद्ध, महिलाओं, बच्चों तथा विशेष योग्यजनों को कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित करना और सामाजिक कुरीतियों-बाल विवाह, दहेज प्रथा, मृत्यु भोज और नशाखोरी के विरुद्ध जनचेतना जागृत करना है।


जिला कलेक्टर निशान्त जैन ने द्वारा जारी आदेश अनुसार सप्ताह का शुभारंभ 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के रूप में किया जाएगा। इस दिन पात्र व्यक्तियों की नवीन पेंशन जारी करना, वयोवृद्ध नागरिकों का सम्मान, बंद पेंशन स्वीकृतियां, चिकित्सा शिविर, वृद्ध व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति जन चेतना शिविर और विचार गोष्ठी का आयोजन प्रातः 10.15 बजे से दोपहर 2 बजे तक अपना घर वृद्धजन वृंदावन एन्क्लेव जयपुर रोड, जयभीम वृद्धाश्रम सिने मैजिक के पास आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में वृद्धजनों के स्वास्थ्य के की जांच, चश्में, छड़ी पुस्तकें आदि का वितरण किया जाएग।


इसी प्रकार 2 अक्टूबर को अनुसूचित जातियों के कल्याण दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन गांधी पार्क में प्रातः 8 बजे महात्मा गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा और स्वच्छ भारत अभियान के तहत छात्रावासों में स्वच्छता अभियान, अस्पृश्यता निवारण पर गोष्ठी तथा बस्तियों में बिजली-पानी की समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा।
वहीं 3 अक्टूबर को अपराधी सुधार दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन जेल के बंदियों की समस्याओं पर गोष्ठी, पारिवारिक विवाद सुलझाना, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं विधिक सहायता तथा पालनहार योजना के लाभ के लिए पात्र बंदियों के प्रकरण तैयार करना तथा भिक्षवृति मुक्ति के लिए कार्य योजना तैयार करना व भिक्षावृति करने के वालों के प्रुनर्वास करना आदि कार्यक्रमों का आयोजन दोपहर 3 बजे से केन्द्रीय करागृह में किया जाएगा।
इसी श्रृंखला में 4 अक्टूबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन आंगनवाड़ी केंद्रों व बालगृहों का निरीक्षण व साफ सफाई अभियान, बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा नशे के दुष्प्रभावों पर जागरूकता के कार्यक्रमों का आयोजन प्रातः 11 बजे से जिले के समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों व राजकीय सम्प्रेषण एवं किशोर गृहों तथा राजकीय बालिका गृह में किया जाएगा।
वहीं 5 अक्टूबर को महिला एवं बालिका कल्याण दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन महिला अधिकारों पर गोष्ठी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम, स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण शिविर एवं स्वास्थ्य जांच नारी निकेतन महिला पुलिस थाने के पास में दोपहर 2 बजे की जाएगी।
इसी प्रकार 6 अक्टूबर को जन जागृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन सामाजिक कुरीतियों- दहेत प्रथा, बाल विवाह, पर्दा प्रथा, मृत्यु भोज आदि के विरुद्ध चेतना, नशा मुक्ति हेतु वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, सेमीनार और प्रचार सामग्री का वितरण प्रातः 10 बजे से नशा मुक्ति केन्द्र पुर्नवास केन्द्र दंतोर तथा वरदान हॉस्पिटल में किया जाएगा।
अंतिम दिन 7 अक्टूबर को विशेष योग्यजन कल्याण दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन दिव्यांगजनों के खेलकूद प्रतियोगिताएं, कृत्रिम अंग व उपकरण वितरण, स्वरोजगार ऋण के शिविरों का आयोजन प्रातः 10.15 से दोपहर 2 बजे तक सेवा आश्रम-2 जारी निकेतन तथा अपना परिवार मानसिक विमंदित एवं पुनपुनर्वास गृह बादनूं व नोखा किया जाएगा।
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- औषधीय फसलों का नया क्षेत्र विस्तार’ के तहत उद्यान विभा ईसबगोल की खेती को देगा बढ़ावा
- किसानों को मिलेगा गुजरात की उन्नत किस्म गुजरात ईसबगोल-2 का बीज
बीकानेर, 30 सितम्बर। उद्यान विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत ‘औषधीय फसलों का नया क्षेत्र विस्तार’ के तहत ईसबगोल की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। जिले में वर्तमान में औषधीय फसलों में ईसबगोल का क्षेत्रफल 50 हजार हेक्टेयर है व काफी तेजी से क्षेत्र बढ़ रहा है।
औषधीय फसलों के क्षेत्र विस्तार को ध्यान में रखते हुए उद्यान विभाग द्वारा 70 किसानों को गुजरात की उन्नत किस्म गुजरात ईसबगोल-2 का उन्नत बीज व अन्य आदान अनुदानित दर पर उपलब्ध करवा प्रदर्शन आयोजित करवाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में ईसबगोल की खेती को बढ़ावा मिल सके।
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक श्री मुकेश गहलोत ने बताया कि औषधीय फसलों के नये क्षेत्र विस्तार हेतु कृषको को अधिकतम 1 हैक्टेयर क्षेत्र के लिए प्रोरेटा बेसिस पर अनुदान देय है। औषधीय फसलों के क्षेत्र विस्तार हेतु प्रति हेक्टेयर इकाई लागत 1.50 लाख रुपए निर्धारित की गई है सामान्य किसानों को लागत का 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित क्षेत्र के किसानों को लागत का 50 प्रतिशत अनुदान उद्यान विभाग द्वारा दिया जाना है।
औषधीय फसलों की खेती करने वाले इच्छुक कृषकों को अनुदान का लाभ दिया जाएगा। कृषकों को औषधीय फसल विशेष के लिये पैकेज ऑफ प्रेक्टिसेज का लीफलेट/साहित्य भी उपलब्ध कराया जाएगा। एक कृषक को प्रोरेटा बेसिस पर अधिकतम 1 हैक्टेयर क्षेत्र तक औषधीय फसलों के नये क्षेत्र विस्तार पर अनुदान दिया जाएगा।
- सहकारी संस्था से करवाएंगे आदान उपलब्धता
उद्यान विभाग के निर्देशानुसार औषधीय पौधो का बीज कृषि विश्वविद्यालय/सम्बद्ध कृषि महाविद्यालय/केन्द्र/राज्य सरकार एवं अन्य राजकीय संस्था से सहकारी संस्थाओ के माध्यम से क्रय करवाकर कृषकों को उपलब्ध कराया जाएगा। पैकेज ऑफ प्रेक्टिस अनुसार उर्वरक, पौध संरक्षण व अन्य आदान/उपादान निर्धारित प्रपत्र में उद्यान विभाग के कृषि पर्यवेक्षक व सहायक कृषि अधिकारी के द्वारा परमिट काटकर सहकारी संस्थाओ के माध्यम से 40 प्रतिशत अनुदानित दर पर उपलब्ध करवाए जाएंगे।
कृषकों द्वारा सहकारी संस्थाओ से शत प्रतिशत लागत पर आदान क्रय कर अनुदान के क्लेम्स विभाग को प्रस्तुत करने पर अनुदान राशि का भुगतान आर.टी.जी.एस. के द्वारा कृषकों को किया जाएगा। कृषक 60 प्रतिशत अंशदान आपूर्ति संस्था को जमा कराकर आदान प्राप्त करने की स्थिति में अनुदान राशि का भुगतान संम्बंधित आपूर्ति संस्था को किया जाएगा।
उपनिदेशक अनुसंधान (ग्राहय प्रशिक्षण केंद्र) श्री प्रेमाराम ने बताया कि किसान संबंधित कृषि पर्यवेक्षक सहायक कृषि अधिकारी उद्यान से संपर्क कर औषधीय क्षेत्र विस्तार ईसबगोल की खेती हेतु स्वयं को ऑनलाइन राज किसान पोर्टल पर पंजीकृत कर योजना का लाभ लें।
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- किसानों के हित में रबी फसल के लिए पांच बारियों का रेगुलेशन कार्यक्रम जारी
बीकानेर, 30 सितम्बर। राज्य सरकार ने बांधों में उपलब्ध जल की स्थिति तथा जैसलमेर में आयोजित जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप इंदिरा गांधी नहर परियोजना के रबी फसल वर्ष 2026-27 के लिए रेगुलेशन कार्यक्रम जारी कर दिया है। उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन एवं किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 41.11 प्रतिशत Better Inflow की संभावना के आधार पर किसानों को कुल पांच बारियां सिंचाई पानी उपलब्ध कराने का कार्यक्रम बनाया गया है।
इस वर्ष फिलिंग पीरियड के दौरान बांधों की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही। पौंग बांध का जलस्तर गत वर्ष की तुलना में लगभग 22 फीट तथा रणजीत सागर बांध का जलस्तर लगभग 48 फीट नीचे रहा। इसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी नहर परियोजना के लिए कुल जल उपलब्धता 9.62 लाख क्यूसेक-डे निर्धारित हो पाई। यह उपलब्धता लगभग रबी वर्ष 2024-25 के स्तर के अनुरूप है। उस वर्ष भी Better Inflow को आधार मानते हुए किसानों को पांच बारियां उपलब्ध कराई गई थीं और इस वर्ष भी उपलब्ध संसाधनों का समुचित प्रबंधन करते हुए पांच बारियों का रेगुलेशन जारी किया गया है।
किसानों की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए इस बार रेगुलेशन की शुरुआत भी विशेष रूप से योजनाबद्ध की गई है। वर्तमान में एक ओर आगामी फसल की बुवाई के लिए पानी की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर पूर्ववर्ती फसल को पकाव के लिए भी सिंचाई पानी की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए पहली बारी में 30 सितंबर प्रातः 6 बजे से 17 अक्टूबर प्रातः 6 बजे तक नहरों को 4 में से 2 समूहों में चलाया जाएगा। इसके बाद 17 अक्टूबर प्रातः 6 बजे से 27 जनवरी 2027 सायं 6 बजे तक शेष चार बारियां 3 में से 1 समूह के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी।
राज्य सरकार किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए उपलब्ध पानी का अधिकतम एवं न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। यदि आगामी अवधि में Better Inflow अपेक्षा से अधिक प्राप्त होता है, तो जनवरी माह में जल उपलब्धता की पुनः समीक्षा की जाएगी तथा परिस्थितियां अनुकूल रहने पर किसानों को एक अतिरिक्त बारी पानी उपलब्ध कराने की संभावना पर भी विचार किया जा सकेगा।
जारी आदेश में किसानों से उपलब्ध सिंचाई जल की मात्रा को ध्यान में रखते हुए कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को प्राथमिकता देने तथा उपलब्ध पानी के अनुरूप ही क्षेत्र में बुवाई करने की अपेक्षा भी की गई है
‘सीमित जल उपलब्धता के बावजूद बेहतर जल प्रबंधन से किसानों के लिए पांच बारियां सुनिश्चित—Better Inflow बढ़ने पर जनवरी में पुनः समीक्षा कर अतिरिक्त बारी की संभावना।’
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- नशे के रूप में प्रयुक्त होने वाली प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर जिले में प्रतिबंध लागू
बीकानेर, 30 सितम्बर। जिले में युवाओं द्वारा कुछ गैर-एनडीपीएस दवाओं का नशे के रूप में दुरुपयोग किए जाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए जिला मजिस्ट्रेट एवं कलक्टर निशांत जैन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर जिले में नशे के रूप में उपयोग की जाने वाली विभिन्न साल्ट आधारित दवाओं की खुली और अनियंत्रित बिक्री पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है।
आदेशानुसार कुछ ऐसी दवाइयां जो तकनीकी रूप से एनडीपीएस एक्ट के तहत नशे के रूप में परिभाषित नहीं हैं, उनका उपयोग लोग टैबलेट या इंजेक्शन के रूप में नशे के तौर पर कर रहे हैं। इसके चलते ऐसी दवाओं के क्रय-विक्रय में अत्यधिक और अनियंत्रित वृद्धि दर्ज की गई है। नवयुवकों के भविष्य और लोकहित को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने यह प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
आदेशानुसार थोक एवं खुरदा विक्रेता द्वारा अथवा अनाधिकृत व्यक्ति या फर्म द्वारा प्रेगाबालिन-75 मि.ग्रा. से (PREGABALIN) अधिक मात्रा की दवाइयों का क्रय-विक्रय नहीं कर सकेगा। पक्के बिल के बिना वो दवाईयां जो एनडीपीएस एक्टे के तहत नशे के रूप में परिभाषित नहीं है जैसे प्रेगाबालिन की 75 मिली ग्राम से अधिक, TAPENTADOL, ZOPICLONEQUETIAPINE साल्ट युक्त दवाइयों का बिना क्रय-विक्रय बिल के बेचान नहीं किया जाएगा।
थोक दवा विक्रेताओं को इन सभी दवाओं के क्रय-विक्रय का दैनिक स्टॉक रजिस्टर बैच नंबर सहित रखना होगा। इसकी साप्ताहिक रिपोर्ट ईमेल के माध्यम से भेजी जानी अनिवार्य होगी। खुदरा विक्रेता उक्त दवाइयों की बिक्री केवल चिकित्सक की मूल प्रिस्क्रिप्शन/पर्ची पर ही करेंगे, साथ ही पर्ची पर अपनी मुहर व दिनांक भी अंकित करना अनिवार्य होगा।
सहायक औषधि नियंत्रक, संबंधित उपखंड अधिकारी और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें बनाकर प्रत्येक माह की 3 से 5 तारीख के मध्य मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया जाएगा।
किसी भी प्रकार की अनियमितता या उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश पूरे सम्पूर्ण जिले में तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और 28 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत नियमानुसार दंडित किया जाएगा।
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- किसानों की मांग के अनुरूप किस्में बीज उत्पादन कार्यक्रम में शामिल करें – डॉ. शर्मा
- बीज उत्पादन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक आयोजित
बीकानेर,30 सितम्बर । स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में संचालित बीज उत्पादन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक बुधवार को अनुसंधान निदेशालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक में किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न फसलों की किस्मों को बीज उत्पादन कार्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया गया। अनुसंधान निदेशक डॉ. एन के शर्मा ने कहा कि किसानों की मांग और गुणवत्ता के अनुसार विभिन्न फसलों की किस्मों को उत्पादन कार्यक्रम में शामिल किया जाए । उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी किस्में उगाने के लिए प्रेरित करें जिनमें कम पानी की आवश्यकता हो। किसानों को उन्नत बीज उत्पादन एवं तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाए। पानी की कमी तथा बदलते जलवायु परिदृश्य को देखते हुए कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों एवं किस्मों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
- बीज उत्पादन में किसानों को सहभागी बनाएं
डॉ शर्मा ने कहा कि प्रत्येक केंद्र अपने आस पास कुछ किसानों को चिन्हित कर बीज उत्पादन कार्यक्रम में शामिल करें। बैठक में सब्जियों के बीज उत्पादन पर भी चर्चा की गई। पालक और मटर सहित अन्य सब्जियों के गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। डॉ. शर्मा ने निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय के सभी बीज उत्पादन कार्यक्रमों का समुचित एवं व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए, ताकि उत्पादन, वितरण और गुणवत्ता संबंधी गतिविधियों का प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ. विजय प्रकाश ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई किस्मों को व्यापक तौर पर बीज उत्पादन कार्यक्रम में शामिल करें तथा बीजों की गुणवत्ता बनाए रखना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों व कृषि अनुसंधान केन्द्रों द्वारा रबी 2025-26 की प्रगति व रबी 2026-27 का लक्ष्य की विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत, डॉ. सागरमल कुमावत सहित अन्य अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
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