वर्तमान में जीना ही जीवन की सार्थकता – साध्वी प्रीतिसुधा

वर्तमान में जीना ही जीवन की सार्थकता - साध्वी प्रीतिसुधा
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025
खमत खामणा
  • बीते कल की चिंता और आने वाले कल की कल्पना छोड़ वर्तमान को भक्ति व तप से सार्थक करने का दिया संदेश

बीकानेर, 30 सितम्बर । रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में तपागच्छीय गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञानुवर्तिनी साध्वीश्री प्रीतिरत्ना, साध्वीश्री प्रीतिसुधा एवं साध्वीश्री प्रीतियशा महाराजसा आदि ठाणा-3 की पावन निश्रा में बुधवार को धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीश्री प्रीतिसुधा महाराज सा ने कहा कि मनुष्य जीवन परमात्मा की दी हुई अनुपम एवं अमृत तुल्य भेंट है। मनुष्य अक्सर या तो अतीत में जीता है या भविष्य की कल्पनाओं में खोया रहता है, जबकि वास्तविक रूप में केवल वर्तमान ही हमारे पास उपलब्ध है। इसलिए वर्तमान क्षण को भक्ति, तप, आराधना और आत्मकल्याण में लगाना चाहिए।

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भविष्य की कल्पनाओं में न गंवाएं वर्तमान

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साध्वीश्री ने सेठ के प्रसंग के माध्यम से समझाया कि मनुष्य भविष्य की योजनाओं में इतना उलझ जाता है कि वर्तमान के अवसरों और जीवन के वास्तविक मूल्य को भूल जाता है। उन्होंने कहा कि भावी योजनाएं बनाना आवश्यक है, लेकिन केवल कल्पनाओं के फेर में वर्तमान को गंवा देना उचित नहीं। वर्तमान में किए गए सत्कर्म ही जीवन को सच्ची सार्थकता प्रदान करते हैं।

मानव जीवन का वास्तविक मूल्य पहचानना जरूरी

कुम्हार और राजा के दृष्टांत का उल्लेख करते हुए साध्वीश्री ने बताया कि जैसे मूल्यवान वस्तु का सही महत्व न जानने पर उसका तुच्छ कार्यों में उपयोग हो जाता है, ठीक वैसे ही मनुष्य भी अपने जीवन के वास्तविक मूल्य को नहीं पहचान पाता। उन्होंने आह्वान किया कि व्यक्ति को काम, लोभ और कषायों का त्याग कर अपने भीतर विनम्रता, संयम और त्याग को स्थान देना चाहिए।

वल्लभ गुरु की पुण्यतिथि पर 6 अक्टूबर से तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन

सुरेंद्र बद्धाणी ने श्रीसंघ को आगामी धार्मिक आयोजनों की जानकारी देते हुए बताया कि वल्लभ गुरुदेव की पुण्यतिथि के अवसर पर 6 से 8 अक्टूबर तक तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके तहत 6 अक्टूबर को आयंबिल आराधना व वल्लभ गुरुदेव की पूजा, 7 अक्टूबर को उवसग्गहरं पूजन तथा 8 अक्टूबर को ऋषिमंडल पूजन का आयोजन किया जाएगा।

धर्मसभा के समापन पर साध्वीश्री ने मांगलिक प्रदान किया तथा साध्वीश्री प्रीतियशा महाराज सा ने तप-आराधना के पचखाण करवाए। आज की श्रीसंघ पूजा का लाभ पुष्पादेवी-सुरेंद्र बद्धाणी परिवार ने लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।