बीकानेर सरकारी समाचार
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- रामपुरा की गली संख्या 11 में चार साल पुरानी पेयजल समस्या का समाधान, अंतिम छोर तक पहुंचा पानी
- अधीक्षण अभियंता जे.के. चारण ने कहा—जनसमस्याओं का समयबद्ध निस्तारण विभाग की प्राथमिकता, विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों पर भी होती है त्वरित कार्रवाई
बीकानेर, 18 अक्टूबर।शहर के रामपुरा क्षेत्र की गली संख्या 11 में पिछले चार वर्षों से चली आ रही पेयजल आपूर्ति की समस्या का समाधान कर क्षेत्रवासियों को राहत प्रदान की गई है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता जे.के. चारण ने बताया कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से मौके पर पेयजल व्यवस्था का निरीक्षण करने के साथ ही गली के अंतिम छोर तक पानी पहुंचने की स्थिति का सत्यापन किया गया। इस दौरान वार्ड संख्या 39 के पार्षद श्री सलमान भी उपस्थित रहे।


समस्या के समाधान के लिए मौके पर पहुंचकर जलापूर्ति व्यवस्था का जायजा लिया गया तथा आवश्यक कार्रवाई करते हुए पेयजल आपूर्ति सुचारू करवाई गई। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि गली के अंतिम छोर पर रहने वाले उपभोक्ताओं तक भी पर्याप्त रूप से पानी पहुंचे। लंबे समय से पेयजल समस्या का सामना कर रहे स्थानीय निवासियों को इससे राहत मिली है।


शिकायतों के निस्तारण के लिए कई माध्यम उपलब्ध
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता जे.के. चारण ने बताया कि आमजन की पेयजल संबंधी समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के लिए विभाग प्रतिबद्ध है। उपभोक्ता अपनी शिकायतें टोल फ्री नंबर 181 के अतिरिक्त विभाग के कंट्रोल रूम नंबर 2226454 पर भी दर्ज करवा सकते हैं। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र के अधिशासी अभियंता (Ex. En.), सहायक अभियंता (AEN) एवं कनिष्ठ अभियंता (JEN) के मोबाइल नंबरों पर प्राप्त होने वाली शिकायतों पर भी आवश्यक कार्रवाई कर उनका निस्तारण किया जाता है।
उन्होंने बताया कि समाचार पत्रों सहित विभिन्न मीडिया माध्यमों के जरिए सामने आने वाली जनसमस्याओं को भी गंभीरता से लिया जाता है। ऐसी शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित कर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाता है। विभाग द्वारा मौके पर की गई कार्रवाई एवं समस्या के समाधान को जनहित से जुड़ी सकारात्मक पहल के रूप में सामने लाने के लिए इस प्रकार की समाधानपरक खबरें भी तैयार की जाती हैं, ताकि आमजन को शिकायत दर्ज करवाने के उपलब्ध माध्यमों तथा उनके निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी मिल सके।
अंतिम छोर तक जलापूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता
चारण ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल शिकायत प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि समस्या का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है। इसके लिए आवश्यकता के अनुसार मौके पर निरीक्षण, जलापूर्ति व्यवस्था की जांच तथा शिकायत के निस्तारण के बाद स्थिति का सत्यापन भी किया जाता है। रामपुरा की गली संख्या 11 में पेयजल समस्या का समाधान इसी दिशा में की गई कार्रवाई का उदाहरण है।इसके अलावा भी शिकायत पर तत्काल कार्यवाही की जा रही है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि पेयजल आपूर्ति से संबंधित किसी भी समस्या की स्थिति में निर्धारित शिकायत माध्यमों का उपयोग करें, ताकि शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सके और उसका समयबद्ध निस्तारण किया जा सके।
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- राष्ट्रीय पोषण माह में बीकानेर का उत्कृष्ट प्रदर्शन, 133 प्रतिशत गतिविधियों के साथ प्रदेश में दूसरा स्थान
- पोषण, स्वास्थ्य एवं जनजागरूकता गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले ने हासिल की उपलब्धि
बीकानेर, 17 अक्टूबर। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान बीकानेर जिले ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, जिले में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 133 प्रतिशत गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसके आधार पर बीकानेर ने राजस्थान में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
निर्धारित कैलेंडर के अनुसार आयोजित की गईं गतिविधियां
समेकित बाल विकास सेवाएं के उप निदेशक डॉ. नरेंद्र शेखावत ने बताया कि भारत सरकार एवं विभागीय निदेशालय से प्राप्त कैलेंडर के अनुसार जिले में राष्ट्रीय पोषण माह की विभिन्न गतिविधियां आयोजित करवाई गईं। इन गतिविधियों की प्रविष्टियां समयबद्ध रूप से पोर्टल पर दर्ज की गईं। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन एवं गतिविधियों की ऑनलाइन प्रविष्टियों को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों के साथ भी बेहतर समन्वय स्थापित किया गया।
अभियान के दौरान आहार विविधता, प्रोटीनयुक्त पोषण, गर्म पके भोजन, सामुदायिक सहभागिता, सुरक्षित मातृत्व तथा बाल्यावस्था की देखभाल एवं विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। इन प्रयासों का उद्देश्य आमजन को पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना रहा।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सराहा
इस उपलब्धि पर डॉ. नरेंद्र शेखावत ने जिले के सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों (CDPO), महिला पर्यवेक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को बधाई देते हुए उनके योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों के प्रभावी संचालन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उनके अथक प्रयासों और समर्पण से ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर विभिन्न सेवाओं एवं जनजागरूकता गतिविधियों का नियमित संचालन संभव हो पाता है।
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान जिले में किए गए सामूहिक प्रयासों ने पोषण संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ ही विभागीय गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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- ऊंटों के वायरल रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी गति, एनआरसीसी बीकानेर एवं एनआईवी पुणे के बीच एमओयू
- ‘वन हेल्थ’ की दिशा में महत्वपूर्ण पहल, ऊंटों से प्राप्त नैनोबॉडीज से मानव रोगों की पहचान एवं निदान में भी मिलेगी मदद
बीकानेर, 17 अक्टूबर। भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे, महाराष्ट्र के मध्य अनुसंधान एवं वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। एनआरसीसी परिसर में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में केंद्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया एवं एनआईवी, पुणे के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने एमओयू दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
ऊंटों एवं मनुष्यों के विषाणुजनित रोगों पर होगा समन्वित अनुसंधान
एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने इस समझौते पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों संस्थान अपनी उपलब्ध वैज्ञानिक विशेषज्ञता, संसाधनों एवं अनुसंधान सुविधाओं का परस्पर उपयोग कर ऊंटों में होने वाले विषाणुजनित (वायरल) रोगों से संबंधित अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगे। इस सहयोग से मानव एवं पशु स्वास्थ्य से जुड़ी संक्रामक बीमारियों की पहचान, आधुनिक निदान पद्धतियों के विकास तथा प्रभावी उपचार संबंधी अनुसंधान को भी नई दिशा मिलेगी।
ऊंटों से प्राप्त नैनोबॉडीज से मानव स्वास्थ्य अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
एनआईवी, पुणे के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ‘वन हेल्थ’ अर्थात एकीकृत स्वास्थ्य की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अवधारणा मानव, पशु एवं पर्यावरण के स्वास्थ्य के परस्पर संबंधों पर आधारित है।
उन्होंने बताया कि ऊंट प्रजाति के पशुओं से प्राप्त नैनोबॉडीज (विशिष्ट प्रकार के सूक्ष्म एंटीबॉडी) का उपयोग मनुष्यों में होने वाले विषाणुजनित रोगों की पहचान एवं उनके गहन अध्ययन में भी किया जा सकता है। इससे भविष्य में अधिक सटीक परीक्षण विधियों और प्रभावी उपचार संबंधी तकनीकों के विकास में सहायता मिलने की संभावना है।
जैव-चिकित्सा अनुसंधान से ऊंट संरक्षण को भी मिलेगा बल
कार्यक्रम में एनआरसीसी की पीएमई सेल के प्रभारी डॉ. राकेश रंजन ने एमओयू के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस समझौते के माध्यम से ऊंटों एवं मनुष्यों में होने वाले विषाणुजनित रोगों पर समन्वित अनुसंधान को गति मिलेगी। साथ ही, जैव-चिकित्सा अनुसंधान में ऊंटों की उपयोगिता के नए आयाम सामने आने से उनके संरक्षण एवं महत्व को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी बल मिलेगा।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञ रहे उपस्थित
इस अवसर पर एनआरसीसी एवं एनआरसीई के डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. रमेश देदर, डॉ. रतन कुमार चौधरी, डॉ. श्याम सुंदर चौधरी, डॉ. विश्वरंजन उपाध्याय एवं डॉ. धवलकांत तथा राजुवास के सहायक आचार्य डॉ. रामकुमार उपस्थित रहे। इनके अलावा केंद्र के श्री आशीष पित्ती, श्री राजेश चौधरी, डॉ. राकेश पूनिया, श्री नेमीचंद बारासा, श्री मीतपाल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

