मुझसे रूठना ना श्याम सांवरे…” भजनों से गूंजा बीकानेर का श्याम मंदिर, अपरा एकादशी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

मुझसे रूठना ना श्याम सांवरे..." भजनों से गूंजा बीकानेर का श्याम मंदिर, अपरा एकादशी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
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बीकानेर, 13 मई। मरुधरा की पावन धरा पर ‘अपरा एकादशी’ के अवसर पर भक्ति का ऐसा रंग चढ़ा कि पूरा शहर ‘श्याममयी’ हो गया। जयपुर रोड स्थित श्याम मंदिर में मंगलवार को सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है, इसी अटूट विश्वास के साथ हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दरबार में शीश नवाया।

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पुष्प वर्षा और दिव्य श्रृंगार ने मोहा मन
अपरा एकादशी पर बाबा श्याम का श्रृंगार किसी उत्सव से कम नहीं था। मंदिर को सजाने के लिए विशेष रूप से दिल्ली और बेंगलुरु से सुगंधित पुष्प मंगाए गए थे।

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भक्तों का समर्पण: बाबा की पोशाक और पुष्प सेवा के लिए भक्तों में इतनी होड़ रहती है कि एकादशी के श्रृंगार के लिए कई दिन पहले ही बुकिंग हो जाती है।

दिव्य आभा: रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक पोशाक में बाबा की मूरत देख हर भक्त मंत्रमुग्ध नजर आया।

भीषण गर्मी में राहत के विशेष इंतजाम
बीकानेर की तपती गर्मी को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने सेवा और सुविधा का अनुपम उदाहरण पेश किया:

एसी और शीतल जल: मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं के लिए एयर कंडीशनर लगाए गए ताकि भजन-कीर्तन में कोई बाधा न आए। साथ ही शुद्ध और ठंडे जल की व्यापक व्यवस्था की गई।

फल सेवा: भीषण लू और गर्मी के बीच भक्तों द्वारा तरबूज और अन्य शीतल फलों का प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर प्रशासन और सेवाभावी भक्तों की इस पहल की चौतरफा सराहना हो रही है।

भजन संध्या और आस्था का संगम
दिनभर मंदिर परिसर भजनों की स्वर लहरियों से गूंजता रहा। “क्यों घबराऊं मैं, मेरा तो श्याम से नाता है” और “मेरी लाज रखना, एक आस तुम्हारी है” जैसे भजनों पर भक्त झूमते नजर आए।

कठिन साधना: आस्था का आलम यह था कि कई श्रद्धालु भीषण गर्मी के बावजूद नंगे पैर बाबा के दर्शन करने पहुंचे।

मनोकामनाओं की अर्जी: महिलाओं ने नारियल पर अपनी मनोकामनाएं लिखकर बाबा के चरणों में सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।

पुजारियों द्वारा विशेष भोग लगाने के साथ ही प्रसाद वितरण की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की गई। अपरा एकादशी का यह आयोजन बीकानेर के भक्तों के लिए सेवा, समर्पण और अटूट विश्वास का एक अविस्मरणीय अध्याय बन गया।

 

sjps