सीबीआई चीफ के चयन पर टकराव,राहुल गांधी ने प्रक्रिया को बताया ‘दिखावा’, रबर स्टैंप बनने से किया इनकार

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी
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नई दिल्ली, 13 मई। देश की शीर्ष जांच एजेंसी, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के नए निदेशक की नियुक्ति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ठन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय चयन समिति की बैठक में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपना ‘डिसेंट नोट’ (असहमति पत्र) दर्ज कराया है। राहुल गांधी का आरोप है कि चयन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और विपक्ष की भूमिका को मात्र एक औपचारिकता तक सीमित कर दिया गया है।

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चयन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाते हुए कई तर्क दिए हैं:

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दस्तावेजों का अभाव: राहुल गांधी का दावा है कि समिति के सामने उम्मीदवारों के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जैसे ‘सेल्फ-अप्रेजल रिपोर्ट’ और ‘360-डिग्री रिपोर्ट’ समय पर पेश नहीं की गईं।

समय की कमी: बैठक के दौरान ही अचानक 69 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड सौंपे गए। राहुल के अनुसार, इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों के प्रोफाइल की सूक्ष्म जांच करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।

सूचना छिपाने का आरोप: उन्होंने कहा कि बिना किसी कानूनी आधार के जानकारी को रोकना चयन प्रक्रिया का उपहास उड़ाने जैसा है, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि सरकार ने उम्मीदवार का नाम पहले से ही तय कर लिया है।

“मैं रबर स्टैंप नहीं हूं” – राहुल का कड़ा संदेश

विपक्ष के नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका केवल सरकार के फैसलों पर मुहर लगाने की नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को चयन समिति में इसलिए शामिल किया गया था ताकि ‘संस्थागत कब्जे’ (Institutional Capture) को रोका जा सके। पत्र में उन्होंने कड़े शब्दों में लिखा कि वे इस “पक्षपाती” प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी असहमति दर्ज करना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।

पुरानी शिकायतों का दिया हवाला
यह पहला मौका नहीं है जब चयन प्रक्रिया विवादों में घिरी हो। राहुल गांधी ने उल्लेख किया कि उन्होंने 5 मई 2025 और 21 अक्टूबर 2025 को भी पत्रों के माध्यम से चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के सुझाव दिए थे, लेकिन सरकार की ओर से उन पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली।

प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश (CJI) और विपक्ष के नेता की इस त्रिपक्षीय समिति में उपजे इस विवाद ने सीबीआई चीफ की नियुक्ति की निष्पक्षता पर एक नई बहस छेड़ दी है।

 

sjps