राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग


- राष्ट्रपति से समय मांगेगा बीकानेर बार एसोसिएशन
बीकानेर, 31 जुलाई । राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर बार एसोसिएशन, बीकानेर ने एक बार फिर संघर्ष तेज कर दिया है। एसोसिएशन ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम बीकानेर जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया है तथा इस संबंध में राष्ट्रपति से प्रत्यक्ष मुलाकात के लिए समय मांगने का निर्णय लिया है।


बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित ने बताया कि ज्ञापन के जरिए राष्ट्रपति का ध्यान राजस्थान विधानसभा द्वारा 28 मई 2003 को सर्वसम्मति से पारित उस ऐतिहासिक शासकीय संकल्प की ओर आकर्षित किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार से राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता देने की अनुशंसा की गई थी। अध्यक्ष पुरोहित ने कहा कि दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद राज्य विधानसभा के संकल्प पर अंतिम निर्णय न होना अत्यंत निराशाजनक है।


समृद्ध साहित्य और सीताकांत महापात्र समिति की सिफारिशों का हवाला
ज्ञापन में रेखांकित किया गया है कि राजस्थानी केवल एक बोली नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की मातृभाषा और समृद्ध साहित्यिक व सांस्कृतिक परंपरा की संवाहक है। साहित्य अकादमी इसे स्वतंत्र भाषा के रूप में मान्यता दे चुकी है और देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों में इस पर शोध कार्य हो रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पूर्व में दिए गए सकारात्मक आश्वासनों तथा सीताकांत महापात्र समिति की उस सिफारिश का भी उल्लेख किया गया, जिसमें राजस्थानी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की स्पष्ट अनुशंसा की गई थी।
मातृभाषा शिक्षा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लेख
बार एसोसिएशन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और हाल ही में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा को लेकर दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थानी को संवैधानिक दर्जा मिलना समय की मांग है। इसके साथ ही राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के स्थायी विभाग गठित करने पर जोर दिया गया।
बार अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित ने स्पष्ट किया कि यह विषय किसी एक वर्ग या संगठन का नहीं, बल्कि संपूर्ण राजस्थान की सांस्कृतिक अस्मिता और करोड़ों प्रदेशवासियों के स्वाभिमान से जुड़ा है। उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।


