वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के चलते 14 मिनट में सोने-चांदी से साफ हुए 65.8 लाख करोड़ रुपये

वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के चलते 14 मिनट में सोने-चांदी से साफ हुए 65.8 लाख करोड़ रुपये
क्विक जेप्स विज्ञापन 13 oct 2026
  • चीन के सोलर सेक्टर में ‘थ्रिफ्टिंग’ तकनीक और औद्योगिक मांग घटने का असर चांदी की कीमतों पर

नई दिल्ली। वैश्विक कमोडिटी बाजारों में 14 अक्टूबर को आए अचानक भूचाल के कारण सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और चीन के औद्योगिक बदलावों के चलते निवेशकों को एक ही सत्र में बड़ा झटका लगा, जिससे कीमती धातुओं की मार्केट वैल्यू से एक झटके में करीब 700 अरब डॉलर (लगभग 65.8 लाख करोड़ रुपये) साफ हो गए।

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अमेरिका से उठी गिरावट की चिंगारी
14 अक्टूबर को अमेरिका के सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े जारी किए गए, जो उम्मीद से अधिक यानी सालाना आधार पर 3.7 फीसदी दर्ज किए गए। इसके चलते निवेशकों में यह आशंका बढ़ गई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती टाल सकता है या दरों को ऊंचा बनाए रख सकता है। इस खबर के बाद अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में जोरदार तेजी आई, और 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर करीब 5.2 फीसदी तक पहुंच गई। सुरक्षित निवेश और बेहतर रिटर्न के विकल्प के रूप में बॉन्ड की ओर झुकाव बढ़ने से बिना ब्याज देने वाली धातुओं, विशेषकर चांदी से पैसा तेजी से बाहर निकाला गया।

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अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में भाव की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 14 अक्टूबर को चांदी का वायदा भाव करीब 6.2 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ 55.82 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। हालांकि, अगले दिन डॉलर के कमजोर पड़ने पर स्पॉट सिल्वर में हल्की रिकवरी देखी गई और यह 56.01 डॉलर के आसपास कारोबार करती नजर आई।
घरेलू मोर्चे पर, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, चांदी के वायदा भाव में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जहां भाव 2,11,143 रुपये से गिरकर करीब 2,00,009 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गए। जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक दबाव और मांग में कमी का रुख जारी रहा, तो कीमतों में आगे भी सुस्ती बनी रह सकती है। आज बीकानेर में 1 किलो चांदी का भाव ₹2,08,275 / kg रहा।

चीन का कनेक्शन और सोलर सेक्टर में ‘थ्रिफ्टिंग’
चांदी की कीमतों में इस मंदी के पीछे चीन के सोलर पैनल उद्योग की बदलती तस्वीर भी एक बड़ा कारक है। रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की प्रमुख सोलर विनिर्माण कंपनियां ओवरकैपेसिटी (क्षमता से अधिक उत्पादन) और मुनाफे के दबाव से जूझ रही हैं। लागत को नियंत्रित करने के लिए कंपनियां अब ‘थ्रिफ्टिंग’ तकनीक का उपयोग कर रही हैं, जिसके तहत हर सोलर सेल में चांदी का उपयोग कम किया जा रहा है। इसके अलावा, तांबे जैसी सस्ती धातुओं को विकल्प के तौर पर आजमाने की कोशिशें भी जारी हैं। ‘सिल्वर इंस्टीट्यूट’ के अनुमान के मुताबिक, इन तकनीकी बदलावों के चलते वर्ष 2026 में औद्योगिक उपयोग के लिए चांदी की मांग में लगभग 2 फीसदी की गिरावट आ सकती है।

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