बीकानेर दशहरा कमेटी से 71 वर्षों से जुड़ा है झाँब परिवार
बीकानेर दशहरा कमेटी से 71 वर्षों से जुड़ा है झाँब परिवार

- तीन पीढ़ियों ने निभाई परंपरा और सेवा की अनूठी जिम्मेदारी
बीकानेर, 16 अक्टूबर । बीकानेर का दशहरा पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की समृद्ध आस्था, संस्कृति और पारंपरिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है। इस ऐतिहासिक आयोजन को सहेजने और निरंतर आगे बढ़ाने में ‘बीकानेर दशहरा कमेटी’ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन 71 वर्षों की गौरवशाली यात्रा में एक ऐसा परिवार भी शामिल है, जिसकी तीन पीढ़ियां पूरी निष्ठा के साथ इस आयोजन से जुड़ी रही हैं। यह झाँब परिवार है, जिसने संस्थापकीय शुरुआत से लेकर वर्तमान प्रशासनिक और सांस्कृतिक दायित्वों को निभाते हुए एक अनूठी मिसाल कायम की है।


महेरचंद झाँब ने रखी थी कमेटी की नींव


बीकानेर दशहरा कमेटी की स्थापना 71 वर्ष पूर्व स्व. महेरचंद झाँब द्वारा की गई थी। उनके दूरदर्शी प्रयासों से शुरू हुई यह सांस्कृतिक परंपरा आज शहर की पहचान बन चुकी है। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए उनके परिवार ने इस विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोए रखा है। महेरचंद झाँब के बाद उनके पुत्र संजय झाँब ने कमेटी के महासचिव के रूप में अपनी सेवाएं दीं और आयोजन को व्यवस्थित रूप देने में अहम भूमिका निभाई।
तीसरी पीढ़ी और धार्मिक प्रसंगों से जुड़ाव
वर्तमान अध्यक्ष सुनीत झाँब: परिवार के ही सुनीत झाँब (महेरचंद झाँब के भाई के पुत्र) वर्तमान में बीकानेर दशहरा कमेटी के अध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व में कमेटी विभिन्न आयोजनों का सुचारू संचालन कर रही है।
दो दशकों से ‘बाबा रामदेव’ की भूमिका: महेरचंद झाँब के दूसरे पुत्र नरेश झाँब पिछले 20 वर्षों से निरंतर दशहरे की झाँकी में ‘बाबा रामदेव’ की सजीव भूमिका निभा रहे हैं। उनका यह समर्पित जुड़ाव धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति परिवार की गहरी आस्था को दर्शाता है।
झाँकी प्रभारी नमन झाँब: महेरचंद झाँब के पौत्र नमन झाँब वर्तमान में दशहरा कमेटी में झाँकी प्रभारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जिससे परिवार की तीसरी पीढ़ी भी इस परंपरा से पूरी सक्रियता से जुड़ चुकी है।
झाँब परिवार की यह सात दशकों लंबी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि किसी भी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने में केवल एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि परिवार की पीढ़ियों द्वारा निभाई जाने वाली साझा जिम्मेदारी सबसे बड़ा संबल होती है। बीकानेर दशहरा कमेटी के 71 वर्षों के इतिहास में इस परिवार का योगदान शहर की सांस्कृतिक विरासत की एक स्वर्णिम गाथा है।

