बीकानेर के 538वें स्थापना दिवस पर पांच दिवसीय ‘उछब थरपणा’ का भव्य आगाज 9 अप्रैल से
बीकानेर के 538वें स्थापना दिवस पर पांच दिवसीय 'उछब थरपणा' का भव्य आगाज 9 अप्रैल से


बीकानेर। 2 अप्रैल। पाँच शताब्दियों से भी अधिक की अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक यात्रा को समेटे हुए बीकानेर नगर का स्थापना दिवस इस वर्ष भी उत्साहपूर्वक मनाया जाएगा। नगर के 538वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में ‘थार विरासत’ एवं ‘राजस्थानी साफा, पगड़ी एवं कला संस्थान’ के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय विशेष समारोह ‘उछब थरपणा’ का आयोजन 9 अप्रैल से 13 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। संस्था सचिव एवं वरिष्ठ साफा कला विशेषज्ञ कृष्णचंद्र पुरोहित ने बताया कि पिछले 16 वर्षों की परंपरा को जारी रखते हुए इस बार का आयोजन विशेष रूप से युवा पीढ़ी और नवाचारों को समर्पित रहेगा।


समारोह की शुरुआत 9 अप्रैल को लाली बाई पार्क स्थित संस्था कार्यालय में विधिवत उद्घाटन के साथ होगी। पहले दो दिन (9 और 10 अप्रैल) नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए चंदा, साफा और पगड़ी कला की दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। वरिष्ठ कला विशेषज्ञ मोना सरदार डूडी के मार्गदर्शन में युवा बालक-बालिकाओं को पारंपरिक पाग और साफा बांधने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे लुप्त होती इस लोक कला को संरक्षण मिल सके।


समारोह के तीसरे दिन, 11 अप्रैल को राजस्थानी लोक संस्कृति के सौंदर्य को प्रदर्शित करने के लिए मांडणा एवं रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन होगा। संस्कृतिकर्मी श्रीमती हेमलता व्यास के निर्देशन में यह प्रतियोगिता नत्थूसर गेट के बाहर स्थित लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में आयोजित की जाएगी। इसके अगले दिन, 12 अप्रैल को शाम 5 बजे बीकानेर के वैभव और गौरवशाली इतिहास को समर्पित एक ‘काव्य रंगत’ सजेगी, जिसमें शहर के ख्यातनाम कवि और शायर अपनी रचनाओं के माध्यम से नगर के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करेंगे।
समारोह के अंतिम दिन, 13 अप्रैल को एक अनूठा नवाचार देखने को मिलेगा। युवा प्रतिभा भानु प्रताप डूडी द्वारा देश-विदेश की हजारों खाली माचिस की डिब्बियों के दुर्लभ संग्रह की प्रदर्शनी ‘भानू का पिटारा’ लगाई जाएगी। इस पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित रूप देने के लिए एक उच्च स्तरीय आयोजन कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें गोपीकिशन छंगाणी, गौरीशंकर व्यास, भवानी सिंह राठौड़ और नन्दकिशोर रंगा सहित कई गणमान्य सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
