हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार ‘एफिडेविट लेकर असली तस्कर को छोड़ा, IO की भूमिका संदिग्ध, SP करें कार्रवाई

हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार
shreecreates
quicjZaps 15 sept 2025

जोधपुर, 30 नवंबर। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की एकलपीठ ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के एक मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया को पक्षपाती और अनुचित करार देते हुए गिरफ्तार आरोपी को जमानत दे दी है। जस्टिस सुदेश बंसल की कोर्ट ने हनुमानगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि पुलिस ने असली आरोपी को बचाने के लिए महज़ एक सादे कागज पर लिखे एफिडेविट के आधार पर दूसरे व्यक्ति को फंसा दिया।
पुलिस जांच पर उठे गंभीर सवाल
जमानत और निर्देश: हाईकोर्ट ने गिरफ्तार किए गए काका सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, हनुमानगढ़ एसपी को निर्देश दिया कि वे तत्कालीन (एसआई जगदीश) और वर्तमान (एसआई लालबहादुर चंद) जांच अधिकारियों (I/O) की भूमिका की जांच करें और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करें।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

मूल मामला: मामला हनुमानगढ़ जिले के संगरिया थाने में 24 जून 2024 को दर्ज एनडीपीएस एफआईआर से जुड़ा है। नाकाबंदी के दौरान एक तस्कर मोटरसाइकिल छोड़कर भागा था, जिससे 20 किलो डोडा-पोस्त बरामद हुआ था।

pop ronak

कॉन्स्टेबल की गवाही दरकिनार: मौके पर मौजूद कॉन्स्टेबल दौलतराम और हरिराम ने भागने वाले तस्कर की पहचान ‘जितेंद्र सिंह पुत्र मेजरसिंह’ के रूप में की थी।

एफिडेविट के आधार पर मिलीभगत
कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने कॉन्स्टेबल की गवाही को दरकिनार कर दिया। मुख्य आरोपी जितेंद्र सिंह ने 2 जनवरी 2024 को पुलिस को एक बिना स्टाम्प वाला शपथ पत्र (Unstamped Affidavit) दिया, जिसमें उसने लिखा कि “भागने वाला व्यक्ति मैं नहीं, बल्कि काका सिंह था।”

मिलीभगत: पुलिस ने इस एफिडेविट को आधार बनाकर छह महीने तक कार्रवाई पेंडिंग रखने के बाद जितेंद्र सिंह को केस से बाहर (Exonerate) कर दिया और याचिकाकर्ता काका सिंह को आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया।

कोर्ट की टिप्पणी: जस्टिस सुदेश बंसल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि जितेंद्र सिंह को उसके बिना स्टाम्प वाले एफिडेविट के आधार पर छोड़ना और याचिकाकर्ता को फंसाना प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण (Malafide) प्रतीत होता है। वर्तमान एफआईआर में जांच पक्षपाती और मिलीभगत वाली लगती है।”

जमानत का आधार और कार्रवाई के निर्देश
कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता काका सिंह और जितेंद्र सिंह के बीच कोई कॉल डिटेल या पैसों का लेनदेन नहीं मिला, न ही घटना के समय काका सिंह का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड था। बरामद मादक पदार्थ भी कमर्शियल मात्रा से कम था।

कोर्ट ने हनुमानगढ़ एसपी को निर्देश दिया कि वे इस “कैमोफ्लाज” (छलावे) की गहन जांच करें। यदि जांच अधिकारियों की गलती या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ चार्जशीट जारी कर विभागीय/दंडात्मक कार्रवाई की जाए और अनुपालना रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। काका सिंह को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *