1857 की क्रांति में असंख्य वीरों ने अपनी जान दी –प्रोफेसर डॉ. बिनानी.

1857 की क्रांति में असंख्य वीरों ने अपनी जान दी --प्रोफेसर डॉ. बिनानी.
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर , 26 अगस्त। पर्यटन लेखक संघ-महफिले -अदब के तत्वावधान में रविवार को होटल मरुधर हेरिटेज में त्रिभाषा काव्य गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें हिंदी,उर्दू और राजस्थानी के रचनाकारों ने अपनी रचनाएं पेश कर वाह वाही लूटी। अगस्त माह देश की आजादी के सन्दर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है ।

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इसी तथ्य को केंद्रित रख कार्यक्रम की अध्यक्षता करते पूर्व प्रिंसीपल, चिंतक, लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचना सुनाई- 1857 की क्रांति, असंख्य वीरों ने अपनी जान दी, इस कुरबानी ने नींव रखी, देश की आजादी की ।

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मुख्य अतिथि इमदादुल्लाह बासित ने तरन्नुम में गजल सुना कर दाद लूटी- क्या करें हम तेरे मैखाने में आ कर साकी, जामे उलफत जो यहां पीना पिलाना है मना।

वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने अपनी गजल में फकीरों की शान बयान की- देख कर शान हम फकीरों की , किस कदर फक है ताजदार का रुख।
संयोजक डॉ ज़िया उल हसन कादरी ने गजल सुना कर दाद लूटी-
पागल हवा ने उसको बुझा तो दिया मगर, दिखला गया ज़माने को इक रास्ता चिराग

इस अवसर पर डॉ जगदीश दान बारहठ,वली मुहम्मद गौरी वली,अमर जुनूनी,अब्दुल शकूर बीकानवी,आबिद परिहार और महबूब देशनोकवी आदि ने भी हिंदी,उर्दू और राजस्थानी में कलाम सुना कर महफिल में नए नए रंग भरे। संचालन डॉ जिया उल हसन कादरी ने किया।

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