पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 हो सकता है महंगा, पांच राज्यों में चुनाव के बाद कीमतों में बड़े उछाल की आशंका

पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 हो सकता है महंगा, पांच राज्यों में चुनाव के बाद कीमतों में बड़े उछाल की आशंका
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नई दिल्ली ,14 अप्रैल। देश में आम उपभोक्ताओं की जेब पर महंगाई की एक बड़ी मार पड़ने वाली है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी (Macquarie) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम लंबे समय से स्थिर हैं। रिपोर्ट का दावा है कि पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों के संपन्न होते ही तेल कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर सकती हैं।

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कंपनियों को हर दिन ₹1,600 करोड़ का नुकसान

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कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आए उछाल के कारण भारतीय तेल कंपनियों को वर्तमान में पेट्रोल पर ₹18 और डीजल पर ₹35 प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार। पिछले महीने के पीक पर तेल कंपनियों का दैनिक घाटा ₹2,400 करोड़ तक पहुंच गया था। एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती के बाद भी कंपनियां वर्तमान में रोजाना ₹1,600 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं। नियम के मुताबिक, कच्चे तेल में प्रति 10 डॉलर के उछाल से कंपनियों का नुकसान करीब ₹6 प्रति लीटर बढ़ जाता है।

कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता

पिछले 46 दिनों के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है:

  • 27 फरवरी: 73 डॉलर प्रति बैरल
  • 19 मार्च: 120 डॉलर प्रति बैरल (पीक)
  • 14 अप्रैल: 100 डॉलर प्रति बैरल

अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट और रूस से आता है। तेल की बढ़ती कीमतें न केवल महंगाई बढ़ाएंगी, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) को भी प्रभावित करेंगी। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही तक यह घाटा बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

सरकारी राजस्व में गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी कमाई में तेल एक्साइज ड्यूटी का योगदान वित्त वर्ष 2017 के 22% से घटकर अब मात्र 8% रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी हटा भी दे, तो भी तेल कंपनियों के मौजूदा घाटे की भरपाई करना मुश्किल होगा।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका सहित पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में पहले ही तेल की कीमतों में भारी इजाफा किया जा चुका है, जिससे भारत पर भी दाम बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है।

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