पद्मश्री लक्ष्मण सिंह लापोड़िया पहुँचे खेजड़ी बचाओ धरने पर; बोले—”पेड़ बचेंगे तो ही बचेगा जीवन”

पद्मश्री लक्ष्मण सिंह लापोड़िया पहुँचे खेजड़ी बचाओ धरने पर; बोले—
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quicjZaps 15 sept 2025
  • रेगिस्तान के कल्पवृक्ष को बचाने की गुहार

बीकानेर, 1 मार्च 2026। पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा माने जाने वाले खेजड़ी वृक्षों के अंधाधुंध विनाश के विरुद्ध बीकानेर में चल रहा जन-आंदोलन अब एक वैश्विक चेतना का रूप ले रहा है। रविवार को पर्यावरण संघर्ष समिति के धरने को अपना समर्थन देने सुप्रसिद्ध पद्मश्री पर्यावरणविद लक्ष्मण सिंह लापोड़िया जयपुर से बीकानेर पहुँचे। उल्लेखनीय है कि बीकानेर मुख्यालय पर यह धरना आज 227वें दिन में प्रवेश कर गया है, जबकि नोखा दईया की खेजड़ला रोही में चल रहे समानांतर धरने को आज 582 दिन पूरे हो गए हैं।

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रेगिस्तान का विनाश दुर्भाग्यपूर्ण: लापोड़िया का तीखा प्रहार
धरना स्थल पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए पद्मश्री लक्ष्मण सिंह लापोड़िया ने खेजड़ी की महत्ता को रेखांकित किया।

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अस्तित्व का आधार: उन्होंने कहा कि “पेड़ बचेंगे तो ही धरती और जीवन बचेगा। पेड़ों से ही पानी है और पेड़ों में ही सर्वत्र जीवन समाहित है।”

प्राकृतिक धरोहर: उन्होंने खेजड़ी को गुणों से भरपूर बताते हुए कहा कि रेगिस्तान के इस कल्पवृक्ष का विनाश न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि हमारी संस्कृति के लिए भी दुर्भाग्यपूर्ण है।

देशभर के पर्यावरणविदों का मिला समर्थन
इस अवसर पर लापोड़िया के साथ राष्ट्रीय स्तर के कई अन्य विशेषज्ञों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:

संजय राणा (बागपत): एस्रो (ASRO) के निदेशक और जाने-माने पर्यावरणविद संजय राणा ने तकनीकी और पारिस्थितिक दृष्टिकोण से खेजड़ी के महत्व को समझाया।

ज्ञानेन्द्र रावत: वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरणविद ज्ञानेन्द्र रावत ने इस आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

राजनैतिक समर्थन: देहात कांग्रेस जिलाध्यक्ष बिशनाराम सियाग भी अपनी पूरी टीम के साथ धरना स्थल पर पहुँचे और इस संघर्ष को तार्किक परिणति तक पहुँचाने का भरोसा दिया।

582 दिनों का लंबा संघर्ष: धरने पर डटे सत्याग्रही
नोखा दईया से लेकर बीकानेर शहर तक, पर्यावरण प्रेमी भीषण गर्मी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रविवार को धरने पर बिशनाराम सियाग, हरिराम खीचड़, शिवदान मेघवाल, शान्तिलाल सेठिया और रामदेव मेघवाल सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। सत्याग्रहियों में रामप्रताप वर्मा, कपिल गौड़, सांवरलाल भादू और जयप्रकाश बागड़वा जैसे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक का जोश देखते ही बन रहा था। धरने पर उपस्थित सरदार दरबारा सिंह, हीरू खां टावरी और हुसैन हिंदुस्तानी ने सांप्रदायिक सौहार्द के साथ पर्यावरण रक्षा का संकल्प दोहराया।

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