एसकेआरएयू के एग्रोनेट(शेडनेट) हाउस में खीरा उत्पादन को लेकर चल रहे शोध कार्य के आए सकारात्मक परिणाम

खीरा उत्पादन को लेकर चल रहे शोध कार्य के आए सकारात्मक परिणाम
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025
  • अब आम किसान ऑफ़ सीजन में एग्रोनेट हाउस के जरिए कम लागत और कम समय में खीरे का ले सकेंगे अधिक उत्पादन
  • पश्चिमी राजस्थान में कम लागत से अधिक उत्पादन व लाभ के लिए एग्रोनेट हाउस में संरक्षित खेती सर्वोत्तम विकल्प- डॉ अरुण कुमार, कुलपति, एसकेआरएयू

बीकानेर, 05 मई। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के एग्रोनेट हाउस (शेडनेट हाउस) में खीरा उत्पादन को लेकर चल रहे शोध कार्य के सकारात्मक परिणाम आए हैं।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

कुलपति डॉ अरुण कुमार ने एग्रोनेट हाउस में खीरा उत्पादन का जायजा लेते हुए बताया कि एग्रोनेट हाउस में खीरे के बीजारोपण के करीब एक महीने बाद ही उत्पादन शुरू हो गया है। उन्होने बताया कि एग्रोनेट हाउस में खीरे की संरक्षित खेती करने से आम किसानों को होने वाले लाभ पर शोध कार्य किया जा रहा है। साथ ही खीरे की खेती में स्प्रे के जरिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम न्यूट्रिशन देने पर उत्पादन में बढ़ोतरी को लेकर भी अध्ययन किया जा रहा है। जिसके शुरुआती परिणाम सकारात्मक आए हैं।

pop ronak

पॉलीहाउस के मुकाबले काफी कम लागत से बनने वाले एग्रोनेट हाउस में खीरे का अच्छा उत्पादन हो रहा है। कोई भी जागरूक कृषक कृषि विश्वविद्यालय में आकर एग्रोनेट हाउस में खीरे की खेती को देख सकता है। उन्होने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में कम समय व कम लागत में अधिक उत्पादन व अधिक लाभ के लिए शेडनेट हाउस में संरक्षित खेती सर्वोत्तम विकल्प है।

हॉर्टिकल्चर विभागाध्यक्ष डॉ पी के यादव ने बताया कि ऑफ सीजन में खीरे का उत्पादन पॉलीहाउस और शेडनेट में किया जाता है। लेकिन मई जून में बहुत अधिक तापमान होने से पॉलीहाउस में खीरा उत्पादन में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। ऐसे में एग्रोनेट हाउस में तापमान कम होने से और आर्द्रता बनी रहने से खीरे की अच्छी फसल ली जा सकती है। एग्रोनेट हाउस में खीरे की क्वालिटी भी अच्छी आती है। कीट रोग प्रबंधन भी आसान है और बूंद बूंद सिंचाई से पानी की बचत भी होती है।लिहाजा आम किसान कम जगह में एग्रोनेट हाउस के जरिए कम लागत से अधिक उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकता है।

पीएचईडी स्टूडेंट गाइड और सहायक आचार्य डॉ सुशील कुमार ने बताया कि शोध विद्यार्थी श्री पवन कुमार खीरे पर शोध कार्य कर रहे हैं। साथ ही इसका अध्ययन भी किया जा रहा है कि क्या एक सामान्य किसान छोटी सी जगह पर शेडनेट हाउस में संरक्षित खेती कर सकता है।लिहाजा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में ही 15 बाई 30 मीटर के शेडनेट हाउस में बिना बीज वाले खीरे की वैरायटी के पौधे लगाए गए हैं। सवा महीने बाद ही खीरे का उत्पादन शुरू हो चुका है। एक दिन छोड़कर एक दिन करीब 40-70 किलो खीरे का उत्पादन हो रहा है जो अगले तीन महीनों तक लगातार जारी रहेगा।

 

sjps
sesumo school

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *