बीकानेर के राव जैतसी ने राती घाटी युद्ध से लहराया विजय का परचम, पश्चिमी सीमा को किया सुरक्षित: डॉ. चक्रवर्ती नारायण श्रीमाली
बीकानेर के राव जैतसी ने राती घाटी युद्ध से लहराया विजय का परचम, पश्चिमी सीमा को किया सुरक्षित: डॉ. चक्रवर्ती नारायण श्रीमाली


बीकानेर, 3 अगस्त । महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) के इतिहास विभाग द्वारा ‘राती घाटी युद्ध’ विषय पर एक विशेष विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय के इतिहासविद डॉ. चक्रवर्ती नारायण श्रीमाली ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यकालीन भारत में बीकानेर के शासक राव जैतसी ने राती घाटी के प्रसिद्ध युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए बाहरी ताकतों के विरुद्ध विजय का परचम लहराया था।


डॉ. श्रीमाली ने अपनी स्वलिखित पुस्तक का संदर्भ देते हुए विद्यार्थियों को राती घाटी युद्ध के ऐतिहासिक संदर्भों, रणनीतियों और परिणामों की सविस्तार जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीकानेर की यह पावन धरा वीर बलिदानियों और शूरवीरों के रक्त से सिंचित है, जिसने देश की पश्चिमी सीमा को पूरी तरह सुरक्षित रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।


इससे पूर्व, कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने स्वागत भाषण में विद्यार्थियों को राष्ट्रीय इतिहास के साथ-साथ क्षेत्रीय और स्थानीय इतिहास का गहन अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। वहीं, विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ. गोपाल व्यास ने राती घाटी के युद्ध को मध्यकालीन भारतीय इतिहास के सबसे निर्णायक युद्धों में से एक बताया, जिसमें स्थानीय राजपूत शक्तियों ने बाहरी आक्रमणकारियों को करारी शिकस्त दी थी।
व्याख्यान के उपरांत विद्यार्थियों के लिए एक संवाद सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें स्नातकोत्तर के छात्र भगवान जोशी, वंदना पुरोहित और संजना सुथार ने भी राती घाटी युद्ध के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का सफल मंचन अतिथि शिक्षक डॉ. मुकेश हर्ष ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जसप्रीत सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर डॉ. रीतेश व्यास, रिंकू जोशी, भगवान दास सुथार, डॉ. संजना चौधरी, सुशीला बिश्नोई, बजरंग कलवानी, उमेश पुरोहित सहित इतिहास विभाग के अनेक शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।


