साध्वी श्री मनुयशा जी पंचतत्व में विलीन, गंगाशहर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब


गंगाशहर (बीकानेर), 13 जनवरी। आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या एवं जैन धर्म की ओजस्वी साध्वी श्री मनुयशा जी (लाछुड़ा) का आज पश्चिम रात्रि 3:27 बजे शांतिनिकेतन सेवा केंद्र में देवलोकगमन हो गया। उनके निधन के समाचार से संपूर्ण जैन समाज और तेरापंथ धर्मसंघ में शोक की लहर छा गई। साध्वी श्री की बैकुंठी यात्रा शांतिनिकेतन सेवा केंद्र से शुरू होकर गंगाशहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई पुरानी लेन स्थित ओसवाल मुक्तिधाम पहुँची, जहाँ पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।



साध्वी श्री मनुयशा जी के आध्यात्मिक जीवन की संक्षिप्त यात्रा
आध्यात्मिक जीवन की संक्षिप्त यात्रा


साध्वी श्री मनुयशा जी का जन्म 31 अगस्त 1967 को मेवाड़ (राजस्थान) के लाछुड़ा गाँव में हुआ था। उन्होंने 24 जनवरी 1996 को लाडनूँ में तत्कालीन आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी से दीक्षा ग्रहण कर संयम पथ पर कदम रखा था। अपने लगभग तीन दशक के दीक्षा पर्याय में उन्होंने राजस्थान, नेपाल, बिहार, बंगाल, असम, भूटान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे सुदूर क्षेत्रों की पदयात्रा कर जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया। उनका अधिकांश समय जप, तप और स्वाध्याय में व्यतीत होता था।

मुनि श्री कमल कुमार जी ने दी काव्यात्मक विदाई
साध्वी श्री के देवलोकगमन की सूचना मिलते ही उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी स्वामी ने शांतिनिकेतन पहुँचकर साध्वी श्री की आत्मा के प्रति मंगलकामना प्रकट की। उन्होंने एक मर्मस्पर्शी कविता के माध्यम से साध्वी श्री के प्रति अपनी भावांजलि अर्पित की।
कठिन व्याधि में भी दिखाई समता की मिसाल
सेवा केंद्र की व्यवस्थापिका साध्वी विशद्प्रज्ञा जी ने बताया कि साध्वी मनुयशा जी पिछले लंबे समय से गठिया जैसी पीड़ादायक बीमारी से जूझ रही थीं, लेकिन उन्होंने इस कष्ट को अत्यंत समता भाव से सहन किया। वे ‘उनोदरी’ जैसे कठिन तप में लीन रहती थीं।
साध्वी श्री लब्धियशा यशा जी ने इस अवसर पर अपनी भावनाऐं प्रकट करते हुए कहा कि साध्वी श्री मनुयशा जी उच्च मनोबल की धनी थी। अंतिम समय में भी अपने कर्मों के प्रति जागरूक थी।
साध्वी मनन यशा जी ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने एक साथ दीक्षा ली थी और अंतिम समय में सेवा केंद्र गंगाशहर में उनकी सेवा (चाकरी) करने का सहज अवसर प्राप्त हुआ। साध्वी लब्धियशा जी ने उन्हें ‘उच्च मनोबल की धनी’ बताया।
समाज ने दी भावभीनी विदाई साध्वी श्री की अंतिम यात्रा (बैकुंठी) में उनके भतीजे जयपुर से विशेष रूप से पहुँचे। तेरापंथ सभा गंगाशहर के अध्यक्ष नवरतन बोथरा के नेतृत्व में समाज के विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं और श्रावक-श्राविका समाज ने उपस्थित रहकर विदाई दी। साध्वीवृंदों ने श्रद्धापूर्ण गीतिकाओं के माध्यम से अपनी साथी साध्वी को अंतिम विदाई अर्पित की।








