प्राकृतिक चिकित्सा का चमत्कार: बीकानेर में ‘कन्या कौशल कार्यक्रम’ के तहत निशुल्क शिविर संपन्न; घुटने के दर्द और माइग्रेन से मिली राहत

प्राकृतिक चिकित्सा का चमत्कार: बीकानेर में 'कन्या कौशल कार्यक्रम
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बीकानेर, 28 फरवरी। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते शारीरिक रोगों के समाधान हेतु कन्या कौशल कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित निशुल्क एक्यूप्रेशर एवं रंग चिकित्सा (Color Therapy) शिविर आमजन के लिए वरदान साबित हुआ। डॉ. सोनाली सक्सेना के निर्देशन में आयोजित इस शिविर में बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों रोगियों ने प्राकृतिक पद्धतियों के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया।

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विशेषज्ञ उपचार: सूरतगढ़ के महावीर प्रसाद सैन ने दी सेवाएं
शिविर में मुख्य उपचारकर्ता के रूप में सूरतगढ़ से पधारे सुप्रसिद्ध एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ श्री महावीर प्रसाद सैन ने अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने रोगियों की शारीरिक समस्याओं का निदान कर बिना किसी दवा के केवल दबाव बिंदुओं (Pressure Points) और रंगों के माध्यम से उपचार किया।

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तत्काल राहत: घुटने के दर्द, कमर दर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं से जूझ रहे कई मरीजों ने उपचार के तुरंत बाद उल्लेखनीय राहत महसूस की।

उपचारित रोग: शिविर में साइटिका, थायराइड, टॉन्सिल, पाचन तंत्र की गड़बड़ी और सिरदर्द जैसी बीमारियों का भी सफलतापूर्वक उपचार किया गया।

रंग चिकित्सा: एलर्जी और चर्म रोगों का अनूठा समाधान
शिविर का मुख्य आकर्षण कलर थेरेपी (रंग चिकित्सा) रही। विशेषज्ञों ने बताया कि शरीर के विशिष्ट अंगों पर रंगों के प्रयोग से ऊर्जा का संतुलन बनाया जाता है। इस पद्धति से एलर्जी और विभिन्न प्रकार के चर्म रोगों (Skin Diseases) से पीड़ित व्यक्तियों को काफी सुकून मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से इन वैकल्पिक पद्धतियों को अपनाकर गंभीर रोगों के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।

गणमान्य जनों ने की पहल की सराहना
शिविर के उद्घाटन अवसर पर गायत्री परिवार के मुख्य ट्रस्टी श्री पवन कुमार ओझा, अविनाश गोयल, पंकज गोयल और भारत भूषण गुप्ता सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अतिथियों ने डॉ. सोनाली सक्सेना की इस जनकल्याणकारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविरों से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा परामर्श मिल पाता है। आयोजकों ने विश्वास दिलाया कि ‘कन्या कौशल कार्यक्रम’ के माध्यम से भविष्य में भी समय-समय पर ऐसे शिविरों का आयोजन जारी रहेगा ताकि आमजन को प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक किया जा सके।

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