साध्वीश्री पुण्ययशा जी का मंडिया प्रवास; गुरु को बताया ऊर्जा और तेजस्विता का प्रतीक

साध्वीश्री पुण्ययशा जी का मंडिया प्रवास; गुरु को बताया ऊर्जा और तेजस्विता का प्रतीक
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quicjZaps 15 sept 2025
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बेंगलुरु/मंडिया, 10 जनवरी । जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ की विदुषी साध्वीश्री पुण्ययशा जी ने अपने मंडिया प्रवास के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा पर गहरा प्रकाश डाला। राजराजेश्वरी नगर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीश्री ने गुरु की तुलना ‘छायानिधि पक्षी’ से की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार छायानिधि पक्षी की छाया मात्र से परम आनंद की प्राप्ति होती है, उसी प्रकार गुरु की करुणा और दृष्टि शिष्य के जीवन को आलोकित कर देती है।
साध्वीश्री पुण्ययशा जी का मंडिया प्रवास; गुरु को बताया ऊर्जा और तेजस्विता का प्रतीक

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साध्वीश्री पुण्ययशा जी का मंडिया प्रवा; गुरु को बताया ऊर्जा और तेजस्विता का प्रतीक
भावपूर्ण शब्दों में कहा कि जब शिष्य की कातर पुकार गुरु के कानों तक पहुँचती है, तब गुरु अपनी आध्यात्मिक विद्युत धारा से शिष्य की एक-एक शिरा को ऊर्जस्वित कर देते हैं। गुरु केवल निर्मलता और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे अपनी उत्कृष्ट क्षमताओं को दूसरों में संचारित करने में भी सक्षम होते हैं। उन्होंने राजराजेश्वरी नगर के श्रावकों की सराहना करते हुए कहा कि चातुर्मास के दौरान यसहाँ के समाज ने सजगता के साथ तप, जप और अनुष्ठानों के माध्यम से समय का श्रेष्ठ सदुपयोग किया है।

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इस अवसर पर राजराजेश्वरी नगर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष राकेश छाजेड़ ने चातुर्मास के दौरान संपन्न हुए विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और अनुष्ठानों की सफलता पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से संघ संवाद के जितेन्द्र घोषल के मार्गदर्शन और सहयोग की सराहना की। कार्यक्रम में मंत्री गुलाब बाँठिया, मनोज डागा, राजेश छाजेड़, और अमित नौलखा सहित बड़ी संख्या में श्रावक समाज उपस्थित था। सभी ने साध्वीश्री के दर्शन कर मंगल उद्बोधन का लाभ उठाया और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की।vबेंगलुरु/मंडिया, 10 जनवरी । जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ की विदुषी साध्वीश्री पुण्ययशा जी ने अपने मंडिया प्रवास के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा पर गहरा प्रकाश डाला। राजराजेश्वरी नगर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीश्री ने गुरु की तुलना ‘छायानिधि पक्षी’ से की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार छायानिधि पक्षी की छाया मात्र से परम आनंद की प्राप्ति होती है, उसी प्रकार गुरु की करुणा और दृष्टि शिष्य के जीवन को आलोकित कर देती है।

साध्वीश्री ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि जब शिष्य की कातर पुकार गुरु के कानों तक पहुँचती है, तब गुरु अपनी आध्यात्मिक विद्युत धारा से शिष्य की एक-एक शिरा को ऊर्जस्वित कर देते हैं। गुरु केवल निर्मलता और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे अपनी उत्कृष्ट क्षमताओं को दूसरों में संचारित करने में भी सक्षम होते हैं। उन्होंने राजराजेश्वरी नगर के श्रावकों की सराहना करते हुए कहा कि चातुर्मास के दौरान यहाँ के समाज ने सजगता के साथ तप, जप और अनुष्ठानों के माध्यम से समय का श्रेष्ठ सदुपयोग किया है।

इस अवसर पर राजराजेश्वरी नगर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष राकेश छाजेड़ ने चातुर्मास के दौरान संपन्न हुए विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और अनुष्ठानों की सफलता पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से संघ संवाद के जितेन्द्र घोषल के मार्गदर्शन और सहयोग की सराहना की। कार्यक्रम में मंत्री गुलाब बाँठिया, मनोज डागा, राजेश छाजेड़, और अमित नौलखा सहित बड़ी संख्या में श्रावक समाज उपस्थित था। सभी ने साध्वीश्री के दर्शन कर मंगल उद्बोधन का लाभ उठाया और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की।
साध्वीश्री ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि जब शिष्य की कातर पुकार गुरु के कानों तक पहुँचती है, तब गुरु अपनी आध्यात्मिक विद्युत धारा से शिष्य की एक-एक शिरा को ऊर्जस्वित कर देते हैं। गुरु केवल निर्मलता और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे अपनी उत्कृष्ट क्षमताओं को दूसरों में संचारित करने में भी सक्षम होते हैं। उन्होंने राजराजेश्वरी नगर के श्रावकों की सराहना करते हुए कहा कि चातुर्मास के दौरान यहाँ के समाज ने सजगता के साथ तप, जप और अनुष्ठानों के माध्यम से समय का श्रेष्ठ सदुपयोग किया है।

इस अवसर पर राजराजेश्वरी नगर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष राकेश छाजेड़ ने चातुर्मास के दौरान संपन्न हुए विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और अनुष्ठानों की सफलता पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से संघ संवाद के जितेन्द्र घोषल के मार्गदर्शन और सहयोग की सराहना की। कार्यक्रम में मंत्री गुलाब बाँठिया, मनोज डागा, राजेश छाजेड़, और अमित नौलखा सहित बड़ी संख्या में श्रावक समाज उपस्थित था। सभी ने साध्वीश्री के दर्शन कर मंगल उद्बोधन का लाभ उठाया और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की।

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