संत कबीर दास जी का 629वां प्राकट्य दिवस बीकानेर में धूमधाम से मनाया गया, दिनभर चला शीतल पेय व प्रसाद वितरण

संत कबीर दास जी का 629वां प्राकट्य दिवस बीकानेर में धूमधाम से मनाया गया, दिनभर चला शीतल पेय व प्रसाद वितरण
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बीकानेर, 16 जून । हिंदी साहित्य के भक्ति काल के निर्गुण शाखा की ज्ञानमार्गी उप-शाखा के महान संत, कवि और अद्वितीय समाज सुधारक संत कबीर दास जी का 629वां प्राकट्य दिवस बीकानेर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सिटी कोतवाली के पास, नया कुआं क्षेत्र में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कबीर पंथ के अनुयायी और स्थानीय नागरिक एकत्र हुए।

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समारोह का शुभारंभ संत कबीर दास जी के तैलचित्र पर पारंपरिक रूप से माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद सुधा आचार्य द्वारा किए गए शंखनाद की पावन गूंज के साथ संत कबीर की भव्य आरती उतारी गई, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। इस दौरान कबीर पंथी भजनों और साखियों के जरिए संत कबीर के मानवतावादी संदेशों को याद किया गया।

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भीषण गर्मी में राहगीरों को पिलाया ठंडा पेय, बांटा अल्पाहार
कबीर जयंती के सुअवसर पर सेवा और परोपकार की भावना अग्रणीय रही। बीकानेर में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों को देखते हुए कबीर पंथ के सेवादारों द्वारा विशेष प्रबंध किए गए थे।

निरंतर सेवा: कार्यक्रम स्थल के बाहर से गुजरने वाले सभी आगंतुकों, राहगीरों और श्रद्धालुओं को दिनभर पूरी आत्मीयता के साथ शीतल पेय (ठंडा शरबत) और अल्पाहार प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। इस पुनीत कार्य से तपती धूप में सफर कर रहे हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली।

कुरीतियों के घोर विरोधी और भक्ति आंदोलन के प्रणेता थे कबीर
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने संत कबीर के जीवन दर्शन और उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कबीर तत्कालीन समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता, पाखंड और सामाजिक कुरीतियों के घोर विरोधी थे। वे सर्वोच्च ईश्वर की सत्ता (एकेश्वरवाद) में अटूट विश्वास रखते थे और उन्होंने समाज को जात-पात से ऊपर उठकर प्रेम और समानता का पाठ पढ़ाया।

उनकी कालजयी रचनाओं और साखियों ने देश के भक्ति आंदोलन को बहुत गहरे स्तर तक प्रभावित किया। संत कबीर के विचारों और भजनों की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी पवित्र वाणियों को सिखों के परम पूजनीय ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ तथा ‘आदि ग्रंथ’ में भी ससम्मान सम्मिलित किया गया है।

बीकानेर में कबीर पंथ के अनुयायियों द्वारा आयोजित इस सफल कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को संभालने में सुधा आचार्य, भीखाराम, श्रवण कुमार, पुखराज, खेमाराम, भंवरलाल, भानीराम, पवन कुमार, बुद्ध राम, राजकुमार, विजय, ताराचंद, मुकेश, पंकज और अनिल सहित समाज के अनेक उत्साही कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई और श्रमदान किया।

 

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