शाकद्वीपीय समाज ने अयोध्या नरेश विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को दी श्रद्धांजलि

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बीकानेर, 29 अगस्त। अयोध्या नरेश और राम मंदिर भूमि प्रन्यास के प्रमुख सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के असामयिक निधन पर बीकानेर के शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज (पुजारी सेवक) ने एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इस सभा में समाज के प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। विमलेंद्र मिश्र का विराट व्यक्तित्व- श्यामोजी वंशज ट्रस्ट के अध्यक्ष जेठमल शर्मा ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अयोध्या राजपरिवार और बीकानेर के शाकद्वीपीय समाज का बहुत पुराना संबंध है। उन्होंने कहा कि समाज ने एक अमूल्य रत्न खो दिया है, जिसकी भरपाई करना नामुमकिन है।

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मुख्य वक्ता श्री आर.के. शर्मा ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अयोध्या विवाद के दोनों समुदायों में अगर कोई सर्वमान्य व्यक्ति थे, तो वह विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र थे। उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि सभी राजनीतिक दलों के लोग उनका सम्मान करते थे। एक संगीत प्रेमी और राम भक्त के रूप में वे सबके प्रिय थे।

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राम मंदिर आंदोलन में योगदान
कल्याण फाउंडेशन की निदेशक कामिनी विमल भोजक मैया ने कहा कि श्री मिश्र मिलनसारिता के पर्याय थे और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि जब विवादित स्थल पर प्रतिमा रखने की स्थिति आई, तो आराध्य श्रीरामलला की प्रतिमा अयोध्या नरेश के घर से ही प्रदान की गई थी और आज भी उसी की पूजा-अर्चना की जाती है।

मावड़िया माता मंदिर के ट्रस्टी दुर्गादत्त भोजक ने कहा कि विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र एक बेहद आकर्षक व्यक्तित्व के ऊर्जावान नेता थे और उनका निधन समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक है।

शोकाकुल श्रद्धांजलि सभा
इस अवसर पर शाकद्वीपीय सहकारी समिति के सदस्य श्रीराम शर्मा, शाकद्वीपीय फ्रेंड्स सोसायटी के मनोज कुमार शर्मा, और वरिष्ठ समाजसेवी रिखबदास शर्मा सहित कई लोगों ने श्री मिश्र के निधन को अपूरणीय क्षति बताया।

श्रद्धांजलि सभा में अनेक गणमान्य महिला और पुरुष उपस्थित थे, जिनमें श्री जेठमल शर्मा, श्रीमती श्वेता शर्मा, एडवोकेट दिलीप शर्मा, विनोद भोजक, राजेंद्र शर्मा, और अन्य शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन नितिन वत्सस ने किया। अंत में, दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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