टीम ‘Hour For Nation’ का नियमित सफाई अभियान, 10 वर्षों से जारी है श्रमदान
टीम 'Hour For Nation' का नियमित सफाई अभियान, 10 वर्षों से जारी है श्रमदान


बीकानेर ,7 दिसम्बर । ‘Hour For Nation’ टीम द्वारा आज प्रातः वृद्धजन भ्रमण पथ पर नियमित सफाई अभियान आयोजित किया गया। यह अभियान, जो पिछले 10 वर्षों से लगातार जारी है, सेवा, सकारात्मकता और सामुदायिक भावना का एक सुंदर उदाहरण पेश करता है।


अभियान और उद्देश्य
सफाई कार्य: टीम के सदस्यों ने हमेशा की तरह समय पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र की सफाई शुरू की। भ्रमण पथ के आसपास जमा कचरा हटाकर क्षेत्र को स्वच्छ, सुंदर और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित बनाया गया।


उत्साह: टीम के सदस्यों में आज विशेष उत्साह था, क्योंकि आगामी “संवाद – संवाद फॉर बेटर बीकानेर” कार्यक्रम (14 दिसंबर) की तैयारियाँ भी ज़ोरों पर हैं। मीडिया चैनल लगातार टीम की गतिविधियों को कवरेज दे रहे हैं, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश फैल रहा है।
Hour For Nation: सेवा का जन-आंदोलन
टीम ‘Hour For Nation’ की शुरुआत साल 2016 में सीए सुधीश शर्मा के नेतृत्व में “देश के लिए कुछ समय” के विचार से हुई थी। इसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक से सप्ताह में केवल एक घंटा समाज और स्वच्छता के लिए श्रमदान करवाना है।
इस आंदोलन की मुख्य पहचानें:
- यह 10 वर्षों से लगातार बीकानेर में सफाई अभियान चला रही है।
- यह कोई दान नहीं—सिर्फ श्रमदान पर विश्वास करती है।
- यह राजनीति से दूर रहकर केवल समाज सेवा करती है।
- यह हर रविवार सुबह शहर के विभिन्न स्थानों, खासकर वरिष्ठ नागरिकों के पथ, सार्वजनिक स्थलों और स्मारकों की सफाई करती है।
- सकारात्मक सोच, अनुशासन और टीम भावना इस अभियान की पहचान है।
- टीम सिर्फ सफाई नहीं करती, बल्कि लोगों को जोड़कर समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी पैदा करती है।
आज के अभियान में उपस्थिति
आज के अभियान में सीए सुधीश शर्मा, डॉ. बृजेन्द्र त्रिपाठी, गुरमोहन सेठी, माणक व्यास, डॉ. अजय श्रीवास्तव, डॉ. अतुल गोस्वामी, रमेश उपाध्याय, सुशील यादव, इन्द्र सिंह, अरुण चम, भवानी सिंह राजपुरोहित, पुरुषोत्तम शर्मा, महेंद्र तिवारी, शक्ति सिंह सेरूना, वसंत दास, ईशान शर्मा, वंदना शर्मा, सुरभि शर्मा, दीपा सिंह, डॉ. रेखा श्रीवास्तव, शनिला ख़ान, मुदिता पोपली, राधा खत्री, मुकेश राजपुरोहित और राजू जाट सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
अंतिम संदेश: “स्वच्छता से ही संस्कार बनते हैं, और संस्कार से ही समाज। हर सप्ताह कुछ समय देश के नाम।”
