समय के सच को लिखना ही लेखक का धर्म— मोनिका गौड़
पिंक फेस्ट में गूंजी राजस्थानी कविता की महक



- पिंक फेस्ट में गूंजी राजस्थानी कविता की महक
जयपुर, 9 फ़रवरी । साहित्य, संगीत और चित्रकला के संगम ‘पिंक फेस्ट’ के पांचवें संस्करण का भव्य आयोजन जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), झालाना में संपन्न हुआ। त्रिआयामी उत्सव के दूसरे दिन साहित्य सत्र विशेष रूप से राजस्थानी भाषा और सृजन पर केंद्रित रहा, जिसमें डॉ. शारदा कृष्ण के नवीन राजस्थानी कविता संग्रह “घर कीं कैवणों चावै” का गरिमामय विमोचन किया गया।


पुस्तक विमोचन के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित बीकानेर की वरिष्ठ साहित्यकार एवं समालोचक मोनिका गौड़ ने कृति की गहन समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने राजस्थानी कविताओं की प्रासंगिकता पर बल देते हुए एक महत्वपूर्ण स्थापना दी। मोनिका गौड़ ने कहा कि “बगत रै साच ने मांडणों लेखक रो धर्म हुवै” (वक्त के सच को चित्रित करना ही लेखक का वास्तविक धर्म है)। उन्होंने डॉ. शारदा की कविताओं में कथ्य की गहराई, तथ्यों की समग्रता और समकालीन विषयों के साथ भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।


लेखन यात्रा और काव्य पाठ
संग्रह की लेखिका डॉ. शारदा कृष्ण ने इस अवसर पर अपनी अब तक की लेखन यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने संग्रह की कुछ चुनिंदा और मर्मस्पर्शी कविताओं का भावपूर्ण वाचन किया, जिसे उपस्थित श्रोताओं और साहित्यकारों ने खूब सराहा। उनकी कविताओं में घरेलू परिवेश और संवेदनाओं के सूक्ष्म चित्रण की विशेष चर्चा रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज ने की, जिन्होंने राजस्थानी साहित्य के वर्तमान परिदृश्य और पिंक फेस्ट जैसे मंचों की उपयोगिता पर विचार रखे। पूरे सत्र का कुशल संचालन कामना राजावत द्वारा किया गया।
साहित्यकारों का जुटाव
पिंक फेस्ट के इस साहित्यिक महाकुंभ में राजस्थान के विभिन्न कोनों से आए प्रबुद्ध रचनाकारों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में वेदव्यास, शिवानी, दर्शना उत्सुक, नीलम पारीक, राज बिजारणिया, हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’ और मेवाराम गुर्जर सहित अनेक गणमान्य साहित्यकारों ने शिरकत कर चर्चा को समृद्ध बनाया। यह उत्सव न केवल कलाओं के प्रदर्शन का मंच बना, बल्कि राजस्थानी भाषा के आधुनिक स्वरूप पर संवाद का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ।
