गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण के गुर सीख रही भावी पीढ़ी

गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण के गुर सीख रही भावी पीढ़ी
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quicjZaps 15 sept 2025
  • करणी इंद्र बाईसा मंदिर में संस्कार शिविर

बीकानेर, 22 मई। गंगाशहर के चौपड़ा बाड़ी स्थित श्री करणी इंद्र बाईसा मंदिर में इन दिनों बच्चों को आधुनिकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति और प्रकृति से जोड़ने की अनूठी पहल की जा रही है। ‘नववैदिक ग्राम प्रोजेक्ट’ के तहत मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय संस्कार शिविर के माध्यम से 5 से 15 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को जीवन के आधारभूत मूल्यों की सीख दी जा रही है।

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श्लोक-दोहों के साथ स्वच्छता और जीव दया का पाठ
शिविर के चौथे दिन प्रशिक्षक निर्मल बरड़िया ने बच्चों को श्लोक और दोहों के माध्यम से गौसेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि मंदिरों में संस्कार निर्माण शिविरों के संचालन की यह महत्वपूर्ण शुरुआत श्री करणी इंद्र बाईसा मंदिर से की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वयं, परिवार, समाज, राष्ट्र और प्रकृति के प्रति उनके उत्तरदायित्वों के लिए तैयार करना है।

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दिनचर्या में शामिल हैं ये महत्वपूर्ण गतिविधियां

  • प्रतिदिन सुबह 7:30 से 9:00 बजे तक चलने वाले इस शिविर में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया जा रहा है।
  • आध्यात्मिक शुरुआत: गीता पाठ, रामचरितमानस की चौपाइयों, नीति श्लोकों और प्रेरक कहानियों के साथ शिविर का आगाज होता है।
  • प्रकृति पोषण: बच्चों को बीज संग्रह, सीड बॉल निर्माण, पानी की बचत, प्लास्टिक नियंत्रण और कचरा प्रबंधन (स्वच्छता के तरीके) सिखाए जा रहे हैं।
  • व्यावहारिक कौशल: गृह वाटिका तैयार करना, पेड़-पौधे लगाने के वैज्ञानिक तरीके और जीव जगत के पोषण हेतु सात महत्वपूर्ण कार्य सिखाए जा रहे हैं।
  • गौसेवा व दायित्व बोध: गौसेवा के सरल सूत्र, व्यवस्था कौशल, योजना निर्माण और अपने कर्तव्यों (दायित्व बोध) के प्रति बच्चों को सजग बनाया जा रहा है।

सामुदायिक सहभागिता और उत्साह
मंदिर से जुड़े ओम ओझा और सूरज सिंह राजपुरोहित ने बताया कि बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए शिविर के दौरान उन्हें मनभावन अल्पाहार भी दिया जाता है। इस प्रशिक्षण अभियान को सफल बनाने में पुजारी अरविंद सेवग, मनोहरलाल खुड़िया, भंवरलाल जस्सू, शिव ओझा, दुर्गाप्रसाद सारस्वत, गोपी सुथार, बबलू सोनी, हरिकिशन नाई, राजू सोनी और वासुदेव ओझा सहित अनेक गणमान्य जन सक्रिय सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

यह शिविर न केवल बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ रहा है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हो रहा है।

 

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