नेत्रदान से अमर हुई करुणा की ज्योति, श्रीडूंगरगढ़ की कमलादेवी डागा ने जाते-जाते दो जिंदगियों को दी ‘रोशनी’
नेत्रदान से अमर हुई करुणा की ज्योति,


श्रीडूंगरगढ़, 21 फरवरी। मानवता और परोपकार की एक अनुपम मिसाल पेश करते हुए श्रीडूंगरगढ़ की कमलादेवी डागा (धर्मपत्नी स्वर्गीय चम्पालाल डागा) ने मरणोपरांत नेत्रदान कर दो दृष्टिहीनों के जीवन में उजाला भरने का संकल्प पूरा किया। 20 फरवरी 2026 को उनके स्वर्गवास के बाद, परिजनों ने शोक की घड़ी में भी धैर्य दिखाते हुए उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान किया और नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई। जैन धर्म के अहिंसा और करुणा के सिद्धांतों को चरितार्थ करने वाला यह पुण्य कार्य पूरे क्षेत्र में चर्चा और प्रेरणा का विषय बना हुआ है।


शोक के क्षणों में ‘महादान’ का संकल्प
स्वर्गवास के तुरंत बाद कमलादेवी के देवर कैलाश चन्द डागा और उनकी पुत्रियों ने नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की। परिवार के इस साहसिक निर्णय ने समाज को संदेश दिया कि मृत्यु के बाद भी हम किसी के जीवन का सहारा बन सकते हैं।


सहयोगी परिवारजन: इस पुनीत कार्य में सरिता संचेती, हेमलता बुच्चा, सुनीता भंसाली, कान्ता बुच्चा, संगीता सहित पूरे डागा परिवार ने अपनी सहमति प्रदान की।
तकनीकी टीम: नेत्रदान का संग्रह प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर के भँवरलाल प्रजापत एवं दिनेश शर्मा द्वारा किया गया।
समाज के गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति
तेरापंथ युवक परिषद के संयोजक अशोक झाबक के नेतृत्व में यह प्रक्रिया पूर्ण हुई। इस दौरान मोमासर सरपंच सरिता संचेती, उपसरपंच जुगराज संचेती, पवन सेठिया, प्रभात अग्रवाल, अंकित भंसाली और राजकुमार नाई सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने डागा परिवार की इस आध्यात्मिक चेतना और मानवीय दृष्टिकोण की हृदय से अनुमोदना की।
तेयुप श्रीडूंगरगढ़ की अपील: “अंधियारे जीवन को रोशन करें”
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (ABTYP) के पवन मांडोत के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के तहत अब तक अनेक लोगों के जीवन में प्रकाश आया है।
संस्था का संदेश: तेरापंथ युवक परिषद् एवं किशोर मंडल ने अपील की है कि मृत्यु के पश्चात नेत्रदान कर मानवता की सेवा करें। नेत्रदान के संकल्प के लिए संस्थान के हेल्पलाइन नंबर 9636288181 पर संपर्क किया जा सकता है।
