साधु-साध्वियों के भीतर निष्ठा और धैर्य जगाने के लिए मर्यादा महोत्सव मनाया जाता है – मुनिश्री कमल कुमार

मर्यादा महोत्सव के दूसरे दिन
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मर्यादा महोत्सव के दूसरे दिन गूँजे आचार्य भिक्षु के सिद्धांत

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गंगाशहर, 24 जनवरी। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में आयोजित 162वें मर्यादा महोत्सव का द्वितीय दिवस शनिवार को तेरापंथ भवन में श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया गया। उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी के पावन सान्निध्य में आयोजित इस समारोह में वक्ताओं ने तेरापंथ धर्म संघ के संविधान और इसकी मर्यादाओं की महत्ता पर प्रकाश डाला।

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मर्यादा और सामुदायिक चेतना का संगम
मुख्य उद्बोधन देते हुए तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी स्वामी ने कहा कि जैन धर्म की महानता उसके सिद्धांतों में निहित है। उन्होंने आचार्य भिक्षु के दूरदर्शी दृष्टिकोण की चर्चा करते हुए बताया कि आचार्य भिक्षु द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव के गहन ज्ञाता थे। उन्होंने मर्यादाओं का निर्माण केवल नियमों के रूप में नहीं, बल्कि साधु-साध्वियों के भीतर निष्ठा और धैर्य जगाने के लिए किया था। मुनि श्री ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने कठोर अनुशासन के साथ-साथ आने वाले आचार्यों को मूल मर्यादा अक्षुण्ण रखते हुए समयानुकूल परिवर्तन का अधिकार भी दिया, जो उनकी प्रगतिशील सोच का परिचायक है।

“मर्यादा साधुत्व की लक्ष्मण रेखा है” — मुनि श्री विमल विहारी

मुनि श्री विमल विहारी जी ने बहुत ही सटीक शब्दों में कहा कि मर्यादा साधुत्व की ‘लक्ष्मण रेखा’ है। यदि कोई साधु इसे लांघता है, तो वह अपने साधुत्व को ही खतरे में डालता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लक्ष्मण रेखा मर्यादा की रेखा थी उसका उल्लंघन होते ही सीता माता क हरण हो गया था। अतः अपने जीवन में मर्यादा का उल्लंघन कभी ना करें।

साधुत्व के लिए ‘ओजोन परत’ है अनुशासन- मुनि श्री प्रबोध कुमार
मुनि श्री प्रबोध कुमार जी ने मर्यादा महोत्सव को तेरापंथ धर्म संघ का ‘संविधान दिवस’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जैसे ओजोन परत पृथ्वी की रक्षा करती है, वैसे ही अनुशासन और मर्यादा साधुत्व की सुरक्षा करते है। उन्होंने कहा कि आगम की मर्यादा, संघ की मर्यादा व महाव्रतों की मर्यादा के सम्यक् पालन से साधुत्व में निखार आता है। मुनि श्री श्रेयांस कुमार जी ने मधुर गीतिका के माध्यम से मर्यादा के प्रति अपनी भावाभिव्यक्ति प्रस्तुत की।

समाज के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने रखे विचार
इस आध्यात्मिक समागम में जैन समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। जैन लूणकरण छाजेड़, मंत्री जतनलाल संचेती, ललित राखेचा, अजित संचेती, दीपक आंचलिया, राजेन्द्र पारख, जगत बैद, श्रीमती प्रेम बोथरा और श्रीमती कनक गोलछा आदि ने मर्यादा महोत्सव के गौरवमयी इतिहास और संघ के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की।

तेरापंथी सभा के मंत्री जतनलाल संचेती ने बताया कि मर्यादा महोत्सव के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से धर्म संघ के अनुशासन को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। मुख्य समारोह रविवार को तेरापंथ भवन में साधुओं व साध्वियों के संयुक्त सान्निध्य में आयोजित होगा।

 

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