ध्यान साधना से ही मन रूपी घोड़े को वश में किया जा सकता है -मुनिश्री कमलकुमार


गंगाशहर (बीकानेर), 11 जनवरी। उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी स्वामी ने रविवार को तेरापंथी सभा गंगाशहर के मंत्री जतनलाल संचेती के निवास पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित किया। मुनि श्री ने अपने ओजस्वी प्रवचन में जीवन प्रबंधन और आत्म-शुद्धि पर जोर देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक शक्तिशाली हाथी को छोटे से अंकुश से और विशाल पहाड़ को वज्र से नियंत्रित या खंडित किया जा सकता है, ठीक उसी प्रकार ध्यान और साधना के माध्यम से भटकते हुए मन रूपी घोड़े को काबू में किया जा सकता है।


मुनि श्री ने वर्तमान जीवनशैली पर प्रहार करते हुए कहा कि आज मनुष्य की दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुकी है। न सोने का समय निश्चित है और न ही भोजन का। उन्होंने आचार्य श्री तुलसी के कालजयी वाक्य ‘सादा जीवन उच्च विचार’ का स्मरण कराते हुए समय की कीमत पहचानने और हर क्षण जागरूक रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि गया हुआ समय कभी वापस नहीं आता, इसलिए समय का सम्यक् उपयोग ही सच्ची बुद्धिमानी है।


भगवान महावीर के सिद्धांतों की प्रासंगिकता प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने जैन दर्शन के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि भगवान महावीर ने जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं के समाधान हेतु मन गुप्ति, वचन गुप्ति और काय गुप्ति की साधना का मार्ग दिखाया था। उन्होंने बताया कि मनुष्य आठ कर्मों के बंधनों में जकड़ा हुआ है और जीवन का लक्ष्य इन कर्मों का क्षय होना चाहिए। उन्होंने सम्यक् ज्ञान की महत्ता बताते हुए कहा कि जिसे यह प्राप्त हो जाता है, वह जन्म-मरण के चक्र को सीमित कर लेता है।
संचेती परिवार की नई पीढ़ी ने पेश की मिसाल
इस धार्मिक आयोजन की सबसे खास बात संचेती परिवार की युवा पीढ़ी द्वारा लिए गए सामाजिक संकल्प रहे। युवाओं ने कुरीतियों और फिजूलखर्ची को त्यागने का आदर्श प्रस्तुत करते हुए संकल्प लिया कि:
- विवाह एवं मांगलिक अवसरों पर 21 व्यंजन से अधिक नहीं बनाएंगे।
- विवाह उत्सवों के दौरान पटाखे नहीं फोड़ेंगे।
- विवाह समारोह में फूलों की होली नहीं खेलेंगे।
मुनि श्री ने युवाओं के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान और बुजुर्गों के प्रति सेवा भाव ही परिवार की असली पूंजी है।
कार्यक्रम के अंत में भव्य संचेती ने सभी का आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर जैन महासभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा, पूर्व अध्यक्ष लूणकरण छाजेड़, तेरापंथ सभा के पूर्व अध्यक्ष अमरचंद सोनी सहित संचेती परिवार के सदस्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।








