ईरान युद्ध की आग में कौन सा निवेश सबसे ज्यादा झुलसा? शेयर, सोना या चांदी?
ईरान युद्ध की आग में कौन सा निवेश सबसे ज्यादा झुलसा? शेयर, सोना या चांदी?


नई दिल्ली/बीकानेर। 28 फरवरी 2026 को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की, तो इसका असर केवल सरहदों तक सीमित नहीं रहा। इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी और भारतीय निवेशकों की ‘गाढ़ी कमाई’ पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। 28 फरवरी से 23 मार्च के बीच के आंकड़े गवाह हैं कि बाजार में हाहाकार मचा रहा।
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध विराम (सीजफायर) के संकेत के बाद बाजारों में कुछ सुधार जरूर दिख रहा है, लेकिन पिछले तीन हफ्तों का नुकसान इतना गहरा है कि उसे भरने में वक्त लगेगा। आइए समझते हैं कि आपके पोर्टफोलियो को सबसे ज्यादा चोट कहाँ पहुंची।


1. शेयर बाजार: 47 लाख करोड़ रुपये स्वाहा
भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च का महीना किसी बुरे सपने जैसा रहा। युद्ध के डर से निवेशकों ने जमकर बिकवाली की।


निफ्टी (Nifty): इसमें करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई। यह 25,496 के स्तर से फिसलकर 23,151 पर आ गया (लगभग 1,400 अंकों का नुकसान)।
सेंसेक्स (Sensex): सेंसेक्स ने तो 10% से भी ज्यादा का गोता लगाया। फरवरी अंत में 82,248 पर रहने वाला सेंसेक्स 23 मार्च को 74,563 के स्तर पर पहुंच गया।
कुल नुकसान: केवल मार्च महीने में ही निवेशकों के 47.53 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
2. सोना: सुरक्षित निवेश का किला भी ढहा
आमतौर पर युद्ध के समय सोने को सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार समीकरण उल्टे रहे। ग्लोबल मार्केट में सोना जो 5,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था, वह 23 मार्च तक गिरकर 4,400 डॉलर के करीब आ गया। यह 18% से ज्यादा की गिरावट है। पिछले सप्ताह सोने में 40 साल की सबसे तेज गिरावट देखी गई।
3. चांदी: निवेशकों की ‘तबाही’ का मुख्य केंद्र
अगर आप सोच रहे हैं कि शेयर या सोने ने सबसे ज्यादा डुबोया, तो आंकड़े कुछ और ही बयां करते हैं। चांदी ने इस युद्ध में निवेशकों को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है। कीमतों में भारी गिरावट: जो चांदी कुछ समय पहले 4 लाख रुपये के स्तर को पार कर गई थी, वह 23 मार्च को 2.06 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। नुकसान का प्रतिशत: चांदी की कीमतों में पिछले एक महीने में 50% तक की भारी गिरावट आई है। वैश्विक बाजार में भी यह 117 डॉलर से टूटकर 60 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
तुलनात्मक विश्लेषण: कहाँ हुआ कितना नुकसान?
निवेश विकल्प गिरावट (%) स्थिति
शेयर बाजार (Sensex/Nifty) ~10% भारी गिरावट (मध्यम जोखिम)
सोना (Gold) ~18% अप्रत्याशित गिरावट (सुरक्षित माना जाने वाला)
चांदी (Silver) ~50% सबसे ज्यादा तबाही (सर्वाधिक नुकसान)
आखिर क्यों डूबा सारा बाजार?
इसका सीधा संबंध ‘डॉलर और कच्चे तेल’ के खेल से है। युद्ध के कारण क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की सप्लाई बाधित हुई और कीमतें बढ़ गईं। चूंकि दुनिया में 90% तेल का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की डिमांड अचानक बढ़ गई।
ऊपर दिए आंकड़ों से यह तो साफ हो गया है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान किसने पहुंचाया है. लेकिन, यह सवाल आज भी निवेशकों के मन में घूम रहा होगा कि युद्ध से शेयर बाजार, सोना और चांदी तीनों ही क्यों इतना डूब गए. इसका एक ही जवाब है तेल और डॉलर. अमूमन आम निवेशकों को इन दोनों चीजों से कोई मतलब ही नहीं होता और उसे तो तेल और डॉलर में निवेश करने का तरीका तक मालूम नहीं. लेकिन, जब ईरान युद्ध ने तेल की सप्लाई पर असर डाला और क्रूड का भाव बढ़ना शुरू हो गया तो डॉलर खुशी से पागल हो उठा. वजह कि दुनियाभर में 90 फीसदी क्रूड की खरीद-बिक्री डॉलर में ही होती है. अब डॉलर की डिमांड बढ़ी तो बड़े निवेशकों ने सोने-चांदी और शेयर बाजार से अरबों-खरबों रुपये निकालकर डॉलर में झोंकना शुरू कर दिया और यह तीनों ही विकल्प देखते ही देखते धराशायी हो गए. जाहिर है कि इसका असर उन निवेशकों पर ज्यादा दिखा जिसे न तो तेल से मतलब था और न डॉलर से.
मार्केट लॉजिक: जब डॉलर मजबूत होता है और उसकी डिमांड बढ़ती है, तो बड़े संस्थागत निवेशक शेयर, सोना और चांदी से पैसा निकालकर डॉलर में निवेश करने लगते हैं। इसी ‘पैसे की शिफ्टिंग’ ने छोटे निवेशकों को तबाह कर दिया।
