कौन है वकील रशेश उपाध्याय? ₹28,000 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क में क्या था रोल, कैसे चढ़ा ED के हत्थे?
कौन है वकील रशेश उपाध्याय? ₹28,000 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क में क्या था रोल, कैसे चढ़ा ED के हत्थे?

बीकानेर/पणजी, 25 अक्टूबर । देश भर में तहलका मचाने वाले लगभग ₹28,000 करोड़ के कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर फ्रॉड नेटवर्क के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी सफलता हासिल की है। ED की पणजी इकाई ने इस अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड नेटवर्क की एक अहम कड़ी माने जा रहे मुंबई के वकील रशेश उपाध्याय (उर्फ रशेश शाह) को गिरफ्तार किया है।


एजेंसी का आरोप है कि आरोपी साइबर फ्रॉड के जरिए ठगे गए पैसों को ठिकाने लगाने और पुलिस द्वारा फ्रीज किए गए संदिग्ध बैंक खातों को कथित तौर पर रिश्वत के दम पर अनफ्रीज (दोबारा चालू) करवाने में मुख्य बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था।



मुंबई एयरपोर्ट के बोर्डिंग गेट से ऐसे चढ़ा ED के हत्थे
ED के सरकारी सूत्रों के मुताबिक, आरोपी रशेश उपाध्याय दिल्ली भागने की फिराक में था।
कहा से हुई गिरफ्तारी: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग और CISF की मदद से ED ने उसे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में सवार होने से ठीक पहले बोर्डिंग गेट के पास हिरासत में ले लिया।
अदालत का फैसला: हिरासत में लेने के बाद ED उसे गोवा (पणजी) ले गई और PMLA (प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी को 29 अक्टूबर तक ED की रिमांड में भेज दिया है।
कुल गिरफ्तारियां: रशेश उपाध्याय की गिरफ्तारी के साथ ही इस हाइटेक साइबर स्कैम में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या अब बढ़कर 7 हो गई है।
क्या है ₹28,000 करोड़ का ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम?
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब गोवा पुलिस ने 9 जून 2025 को एक FIR दर्ज की।
गोवा की महिला से ठगी: एक पीड़िता को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ दिखाकर 21 मई से 2 जून 2025 के बीच अलग-अलग म्यूल (फर्जी/किराए के) बैंक खातों में ₹2.60 करोड़ ट्रांसफर करवा लिए गए थे।
20 राज्यों में फैला जाल: ED की जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खाते देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 300 से अधिक शिकायतों और 160 से ज्यादा FIR से जुड़े हैं, जिनमें कुल मिलाकर ₹400 करोड़ से अधिक का सीधा नुकसान हुआ है।
लेनदेन का विशाल आंकड़ा: जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े खातों में कुल ₹28,000 करोड़ के बैंकिंग ट्रांजैक्शन और ₹2,900 करोड़ से ज्यादा का कैश डिपॉजिट ट्रेस किया गया है।
नेटवर्क में रशेश उपाध्याय की क्या थी भूमिका?
ED ने विशेष अदालत के समक्ष दावा किया कि रशेश उपाध्याय इस सिंडिकेट का ‘की नोड’ यानी मुख्य नेटवर्क पिलर था:
खाते अनफ्रीज कराने का जिम्मा: साइबर सेल या पुलिस द्वारा फ्रॉड के जिन म्यूल खातों को ब्लॉक/फ्रीज किया जाता था, आरोपी वकील अंगड़ियों (पारंपरिक हवाला कारोबारी) के माध्यम से जांच अधिकारियों तक कथित रिश्वत पहुंचाकर उन खातों को फिर से चालू करवाता था।
बिना वकालतनामा का काम: आरोपी ने खुद को वकील के तौर पर रजिस्टर्ड कर रखा था, लेकिन उसने नेटवर्क से जुड़ी किसी कंपनी या आरोपी की तरफ से कभी अदालत में आधिकारिक वकालतनामा दाखिल नहीं किया।
म्यूल खातों से फॉरेन करेंसी का खेल: पीड़िता से ठगे गए पैसे को कमोडिटी, ट्रैवल और फॉरेक्स से जुड़ी कंपनियों के करीब 400 फर्जी खातों में घुमाया गया। वहां से नकद रकम निकालकर RBI से लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर्स के जरिए उसे विदेशी मुद्रा में बदलकर विदेश भेजा जाता था।
जांच में अब आगे क्या?
ED की टीम अब उन पुलिस अधिकारियों, अंगड़ियों और अन्य प्रशासनिक बिचौलियों का पता लगा रही है, जिन्होंने कथित तौर पर रिश्वत लेकर इन साइबर अपराधियों के खातों को अनफ्रीज करने में मदद की।
क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’?
साइबर ठग खुद को CBI, ED, पुलिस या कस्टम्स अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर डराते हैं कि उनके नाम से कोई संदिग्ध पार्सल या अपराध जुड़ा है और उन्हें घर में ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नाटक रचकर पैसे ऐंठते हैं।
सावधानी: भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसा कोई भी कॉल आने पर घबराएं नहीं और तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

