देश भर के 103 पशुपालकों ने बीकानेर में सीखे वैज्ञानिक पशुपालन के गुर, मूल्य संवर्धित उत्पाद ‘मरु हिना’ मेहंदी का हुआ विमोचन

देश भर के 103 पशुपालकों ने बीकानेर में सीखे वैज्ञानिक पशुपालन के गुर, मूल्य संवर्धित उत्पाद 'मरु हिना' मेहंदी का हुआ विमोचन
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 19 मई। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) में आयोजित सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का मंगलवार को कृषि महाविद्यालय के सभागार में भव्य समापन हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण में राजस्थान सहित उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों और पशुपालकों ने वैज्ञानिक तरीकों से भेड़ एवं बकरी पालन करने तथा इसके माध्यम से उद्यमिता (इंटरप्रेन्योरशिप) विकास के गुर सीखे। समापन समारोह के मुख्य अतिथि और जाने-माने विशेषज्ञ श्री कृष्ण मुरारी ने संभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि और पशुपालन सदियों से भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका की रीढ़ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज सरकार पशुपालकों को कई तरह की आधुनिक सुविधाएं दे रही है, जिनका लाभ उठाकर आर्थिक संपन्नता लाई जा सकती है। बशर्ते, पारंपरिक पशुपालन को वैज्ञानिक ज्ञान, नवाचार और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से जोड़ा जाए। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि शहरों की तरफ होने वाला पलायन भी रुकेगा। उन्होंने युवा किसानों से आह्वान किया कि वे रोजगार तलाशने के बजाय खुद रोजगार प्रदाता बनें।

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विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र बाबू दुबे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि देश के विभिन्न कोनों से इतनी बड़ी संख्या में पशुपालकों का इस प्रशिक्षण से जुड़ना यह साबित करता है कि युवा किसानों का रुझान अब पशुपालन के क्षेत्र में उद्यमिता विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पशुपालन सीमांत और छोटे किसानों के लिए विपरीत परिस्थितियों में जोखिम उठाने का एक बेहतरीन संबल है। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए किसानों को ‘समन्वित कृषि मॉडल’ (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) के साथ-साथ जैविक खेती (ऑर्गेनिक फार्मिंग) को भी अपनाना होगा। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विजय प्रकाश ने सात दिनों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि शिविर में कुल 103 प्रतिभागी शामिल हुए, जिनके लिए 28 विशेष सत्र आयोजित कर सैद्धांतिक और प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) दोनों प्रकार का गहन प्रशिक्षण दिया गया।

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प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. शंकर लाल ने कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए बताया कि पशुपालकों को भेड़-बकरी पालन के वैज्ञानिक तौर-तरीकों, उचित पोषण, आवास प्रबंधन और नियमित टीकाकरण की व्यावहारिक समझ विकसित करने के लिए विभिन्न डेयरी व पशुपालन फर्मों का भ्रमण करवाकर ‘हैंड्स ऑन ट्रेनिंग’ (व्यावहारिक प्रशिक्षण) दी गई। इसके साथ ही, केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं तथा बैंक ऋण प्राप्त करने की जटिल प्रक्रियाओं से भी उन्हें अवगत कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान संभागियों को विश्वविद्यालय की समन्वित कृषि प्रणाली इकाई में सिरोही नस्ल की बकरी पालन तथा केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI) बीकानेर में मगरा, चोकला और मारवाड़ी भेड़ों की उन्नत नस्लों के लाइव प्रदर्शन दिखाए गए। इसके अलावा राजूवास (RAJUVAS) बीकानेर के विभिन्न केंद्रों का भ्रमण करवाकर वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन की बारीकियाँ सिखाई गईं। इस दौरान पशुपालकों ने केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना में आवेदन की प्रक्रिया को पुनः प्रारंभ करने की मांग उठाई।

समारोह के अंतिम चरण में उपस्थित अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में उगे औषधीय व व्यावसायिक मेहंदी के पौधों से तैयार मूल्य संवर्धित उत्पाद ‘मरु हिना’ का विधिवत विमोचन किया गया। इसके बाद सभी सफल प्रशिक्षणार्थियों को आधिकारिक प्रमाण पत्र, विषय-संबंधित बुकलेट और प्रशिक्षण किट का वितरण किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. कुलदीप प्रकाश शिंदे ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों और देश भर से आए संभागियों का आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया।

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