राजस्थान में 6.80 करोड़ रुपए के बॉस स्कैम में 11वीं गिरफ्तारी

राजस्थान में 6.80 करोड़ रुपए के बॉस स्कैम में 11वीं गिरफ्तारी
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खमत खामणा
  • ओडिशा से कंपनी का MD गिरफ्तार; खाते में आए थे ठगी के 2 करोड़ रुपए

जयपुर , 21 सितम्बर । राजस्थान में बहुचर्चित 6.80 करोड़ रुपए के ‘बॉस स्कैम’ (Boss Scam) साइबर ठगी मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 11वें आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने ओडिशा के भुवनेश्वर से एसएसजीसी इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (SSGC Engineering Pvt. Ltd.) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) विवजीत टी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के नियंत्रण वाले बैंक खाते में ठगी की राशि में से करीब 2 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे, जिन्हें बाद में अलग-अलग खातों में घुमाया गया।

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भुवनेश्वर से डिटेन कर ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाई पुलिस

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एडीजी (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह ने बताया कि बैंकिंग ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी विवजीत टी की भूमिका संदिग्ध पाई गई। साइबर क्राइम पुलिस टीम ने आरोपी को खारवेल नगर, भुवनेश्वर (ओडिशा) से डिटेन किया और स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड हासिल कर जयपुर लाया गया, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है।

सब्सिडी और लोन के नाम पर लिया बैंक एक्सेस, कमीशन का दिया लालच

पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर ठगों ने सब्सिडी, टैक्स छूट और एमएसएमई (MSME) लोन दिलाने का झांसा देकर आरोपी की कंपनी के दस्तावेज हासिल किए थे।

खाता खुलवाकर दी गई इंटरनेट बैंकिंग ID-पासवर्ड

ठगों के कहने पर आरोपी ने भुवनेश्वर स्थित बैंक में कंपनी का खाता खुलवाया। गत 21 अगस्त को आरोपी पश्चिम बंगाल के दीघा गया, जहां उसने एक व्यक्ति को बैंक खाते से लिंक मोबाइल सिम, इंटरनेट बैंकिंग आईडी और पासवर्ड सौंप दिए।

कमीशन का खेल

आरोपी को आश्वासन दिया गया था कि कंपनी के खाते में रकम आएगी और उसे आगे ट्रांसफर करने के एवज में मोटा कमीशन दिया जाएगा। पुलिस अब इस दावे की वैज्ञानिक व बैंकिंग साक्ष्यों से जांच कर रही है।

म्यूल अकाउंट, टेलीग्राम और क्रिप्टोकरेंसी से चल रहा था नेटवर्क , पूछताछ में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

लेयरिंग (Layering): गिरोह टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए फर्जी और म्यूल बैंक अकाउंट, एटीएम, सिम और इंटरनेट बैंकिंग का एक्सेस खरीदता था।

क्रिप्टो में ट्रांसफर: खातों में ठगी की रकम पहुंचते ही उसे एटीएम/चेक से कैश निकाला जाता था या यूपीआई/सीडीएम के जरिए दर्जनों खातों में ट्रांसफर कर ‘लेयरिंग’ की जाती थी।

बाइनेंस का इस्तेमाल: अंत में इस राशि को ‘USDT’ (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलकर बाइनेंस जैसे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स के जरिए नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं तक पहुंचाया जाता था।

राजस्थान साइबर पुलिस की आमजन हेतु एडवाइजरी
साइबर क्राइम पुलिस ने आमजन और व्यापारियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है:

खाता-सिम शेयर न करें: किसी भी अनजान या प्रलोभन देने वाले व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम या डिजिटल वॉलेट इस्तेमाल के लिए न दें।

सत्यापन जरूरी: अपने खाते में अचानक आई अनजान रकम को बिना पुलिस/बैंक सत्यापन के किसी अन्य खाते में ट्रांसफर न करें।

हेल्पलाइन 1930: किसी भी प्रकार की संदिग्ध साइबर घटना या ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।