उदासर में ‘श्री अनेकान्त विहार’ का भव्य लोकार्पण कल; मात्र 10 रुपये प्रति माह में छत पाएंगे जैन समाज के जरूरतमंद परिवार


बीकानेर, 15 जनवरी । समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को संबल देने और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के ध्येय के साथ ग्राम पंचायत रोड, उदासर में नवनिर्मित ‘श्री अनेकान्त विहार’ का लोकार्पण शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को होने जा रहा है। श्री जनमंगल फाउंडेशन, बीकानेर द्वारा मुनिश्री अनेकान्त विजयश्री महाराज की पावन स्मृति में निर्मित यह प्रकल्प आधुनिक दौर में सामाजिक परोपकार की एक बेमिसाल मिसाल पेश कर रहा है।


फाउंडेशन के विमल कोचर और विनोद दस्साणी ने जानकारी दी कि इस आवासीय परिसर में 76 फ्लैट्स (1 BHK और 2 BHK) का निर्माण किया गया है। इस योजना की सबसे विशिष्ट बात यह है कि जैन समाज के जरूरतमंद परिवारों को ये फ्लैट मात्र 10 रुपये प्रति माह के टोकन शुल्क पर निवास हेतु उपलब्ध कराए जाएंगे। यह प्रतीकात्मक शुल्क इसलिए रखा गया है ताकि समाज की इस संपत्ति पर कानूनी अधिकार ट्रस्ट का बना रहे और जरूरतमंदों को सम्मानजनक आश्रय मिल सके।


आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी की पावन निश्रा में उत्सव
परियोजना के समन्वयक सुशील बैद और विकास सिरोहिया ने बताया कि पिछले चार वर्षों के अथक परिश्रम से तैयार इस विहार का लोकार्पण शुक्रवार सुबह 10:30 बजे गच्छाधिपति, पद्मश्री विभूषित आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी महाराज एवं आदि ठाणा के मंगलपाठ और पावन सानिध्य में होगा। समाजरत्न जेठमल सुराणा, जिन्होंने पिछले 58 वर्षों से अपना जीवन समाजसेवा को समर्पित किया है, उनके मार्गदर्शन में इस प्रकल्प ने मूर्त रूप लिया है।
सक्षम बनने तक समाज का सहारा
ट्रस्ट के सदस्य गणेशमल बोथरा ने योजना की शर्तों को स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रारंभ में यह फ्लैट मात्र 10 रुपए प्रति माह टोकन के रूप में तीन वर्ष की अवधि के लिए आवंटित किए जाएंगे। यदि तीन वर्ष बाद भी संबंधित परिवार आर्थिक रूप से स्वयं का मकान बनाने में सक्षम नहीं हो पाता है, तो वे पुनः पंजीकरण करवाकर अपनी अवधि का विस्तार करवा सकते हैं। निर्माण कार्य की नींव आचार्य श्री जयानन्दजी सूरीश्वरजी के आशीर्वाद से रखी गई थी। उल्लेखनीय है कि मुनिश्री अनेकान्त जी महाराज के तीनों सुपुत्र आचार्यश्री जयानन्दसागर जी महाराज, गच्छाधिपति धर्मधुरंधरसूरिश्वर जी महाराज एवं गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी महाराज संत साधना के उच्चतम शिखर पर विराजित हैं जिनके आशीर्वाद से यह भूमि पावन हुई है।








