एमजीएसयू में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला; अमेरिका के म्यूजियम में छाई बीकानेर की मिनिएचर पेंटिंग्स, महावीर स्वामी ने साझा किए अनुभव
एमजीएसयू में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला;


बीकानेर, 21 जनवरी। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) के इतिहास विभाग द्वारा बुधवार को राजस्थानी लघु चित्र शैली के इतिहास और प्रभाव पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस गौरवशाली आयोजन में बीकानेर की मिनिएचर पेंटिंग शैली को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने वाले विख्यात कलाकार महावीर स्वामी ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।


अमेरिका के संग्रहालयों में बीकानेर का मान
कार्यशाला को संबोधित करते हुए महावीर स्वामी ने विद्यार्थियों को गर्व के साथ बताया कि बीकानेर शैली की मिनिएचर पेंटिंग्स आज अमेरिका के प्रमुख संग्रहालयों जैसे ब्रुकलिन और फिलाडेल्फिया म्यूजियम में प्रमुखता से प्रदर्शित हैं। उन्होंने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए अपने संग्रह से ‘बारहमासा श्रृंखला’ के आषाढ़ चित्र, महाराजा सूरत सिंह के ऐतिहासिक चित्र और 16वीं सदी के कुंभ मेले के दुर्लभ लघु चित्रों का प्रदर्शन कर विद्यार्थियों को इस कला की बारीकियों से रूबरू करवाया।


कोरियाई और जापानी कला का संगम
कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में दक्षिण कोरिया के चित्रकार बे सुंग वॉन ने हिस्सा लिया। उन्होंने कोरिया में मिनिएचर पेंटिंग के प्रभाव और अपने भारतीय चित्रकला सीखने के सफर को साझा किया। वहीं, आयोजन सचिव डॉ. खुशाल पुरोहित ने जापानी चित्रकार ओसामू तेज़ुका की बुद्ध पर आधारित पुस्तकों का प्रदर्शन किया, जो वर्तमान में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं।
नई शिक्षा नीति और उद्यमशीलता
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने विषय प्रवर्तन करते हुए बताया कि लघु चित्र शैली में पौराणिक और राजसिक दृश्यों में सुनहरे रंगों का अनूठा प्रयोग होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत विद्यार्थियों में उद्यमशीलता (Entrepreneurship) जगाने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है, ताकि युवा इस पारंपरिक कला को करियर के रूप में अपना सकें।
गणमान्य जनों की उपस्थिति
कार्यक्रम का समापन डॉ. रीतेश व्यास के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. मुकेश हर्ष, डॉ. गोपाल व्यास, डॉ. नमामी शंकर आचार्य सहित विभाग के सदस्य और लगभग 120 विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला ने विद्यार्थियों को कला के इतिहास के साथ-साथ उसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग और प्रासंगिकता को समझने का अवसर प्रदान किया।
