अखिल भारतीय प्रौढ़ शिक्षा कान्फ्रेंस भुवनेश्वर में शुरू

अखिल भारतीय प्रौढ़ शिक्षा कान्फ्रेंस भुवनेश्वर में शुरू
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भुवनेश्वर/बीकानेर , 21 जनवरी। भुवनेश्वर स्थित कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (KISS) में 21-23 जनवरी 2026 तक 66वीं अखिल भारतीय प्रौढ़ शिक्षा कान्फ्रेंस का आयोजन हो रहा है। Iaea-india यह सम्मेलन इंडियन एडल्ट एजुकेशन एसोसिएशन, नई दिल्ली और कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, भुवनेश्वर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।

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कान्फ्रेंस का मुख्य विषय “सभी के लिए प्रौढ़ और आजीवन शिक्षा को बढ़ावा देना” है। उप-विषयों में शामिल हैं:

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  • NEP 2020: सभी के लिए प्रौढ़ और आजीवन शिक्षा के लिए वैचारिक ढांचा
  • पूर्ण रोजगार के लिए शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका
  • पूर्ण रोजगार के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण
  • आदिवासी समुदायों की कौशल आवश्यकताएं और सशक्तिकरण
  • आदिवासी समुदाय के बीच स्वदेशी ज्ञान और कौशल का संरक्षण
    प्रौढ़ और आजीवन शिक्षा के उन्नयन के लिए सामुदायिक संगठनों की भूमिका

भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ (नई दिल्ली) और कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (कलिंगा विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर) के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन बुधवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में पहले सत्र को प्रमुख शिक्षाविद, साहित्यकार और भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ के एसोसिएट सचिव राजेन्द्र जोशी ने संबोधित किया।

साक्षरता आंदोलन के दूरदर्शी थे के.सी. चौधरी

अधिवेशन के दौरान ‘आजीवन सीखने की अवधारणा में के.सी. चौधरी का योगदान’ विषय पर चर्चा करते हुए राजेंद्र जोशी ने कहा कि चौधरी ने देश में साक्षरता आंदोलन को न केवल गति दी, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले बदलावों को दशकों पहले ही भांप लिया था। उन्होंने बताया कि चौधरी के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देश के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में निरक्षरता उन्मूलन के कार्य धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

डिजिटल युग की चुनौतियां और आजीवन अधिगम

जोशी ने अपने संबोधन में आधुनिक समय की चुनौतियों, जैसे डिजिटल साक्षरता, बदलते वैश्विक पाठ्यक्रम और व्यक्तिगत विकास की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि “आजीवन अधिगम” (Life-long Learning) केवल एक किताबी शब्द नहीं है, बल्कि बदलते युग के साथ खुद को ढालने की एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ के माध्यम से किए जा रहे नवाचारों को आधुनिक चुनौतियों से निपटने का सशक्त माध्यम बताया।

देशभर के 200 से अधिक शिक्षाविदों का जमावड़ा

इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से 200 से अधिक ख्यातनाम शिक्षाविद और शोधार्थी भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान मंच पर प्रोफेसर एल. राजा, प्रोफेसर एन.के. अम्बसट, सुरेश खण्डेलवाल, पी.ए. रेड्डी और प्रोफेसर राजेश जैसे दिग्गजों का सान्निध्य रहा। वक्ताओं ने प्रौढ़ शिक्षा के बदलते स्वरूप और सामाजिक विकास में इसकी भूमिका पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।यह एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर का आयोजन है जो प्रौढ़ शिक्षा और आजीवन सीखने को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

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