ऊँट पालन के नवीन मॉडल और डेयरी व्यवसायीकरण पर जोर

ऊँट पालन के नवीन मॉडल और डेयरी व्यवसायीकरण पर जोर
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quicjZaps 15 sept 2025

एनआरसीसी में अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक संपन्न

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बीकानेर , 06 फ़रवरी। भाकृअनुप- राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर की अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) की बैठक का आज दिनांक 06 फरवरी, 2026 को डॉ.रामेश्‍वर सिंह, वाइस चासंलर, गुरु काशी यूनिवर्सिटी, पंजाब की अध्यक्षता में आयोजित की गई । हाईब्रीड मोड में आयोजित इस महत्‍वपूर्ण बैठक में समिति सदस्य के रूप में डॉ. त्रिभुवन शर्मा, कुलगुरू, राजुवास, जोबनेर, डॉ.प्रमोद कुमार राउत, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार- डीजी, भाकृअनुप, नई दिल्‍ली, डॉ.रणधीर सिंह, पूर्व एडीजी, आईसीएआर, नई दिल्‍ली, श्री रणवीर सिंह भादू, किसान प्रतिनिधि, बाड़मेर तथा डॉ. आशिष कुमार सामंता, सहायक महानिदेशक (एएनपी), भाकृअनुप, नई दिल्‍ली, डॉ.एस. वैद्यनाथन, पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय मांस अनुसंधान संस्‍थान, हैदराबाद एवं डॉ.वी.पी.सिंह, पूर्व निदेशक, निशाद एवं अधिष्‍ठाता, वेटरनरी कॉलेज, झांसी ने सहभागिता निभाई । एनआरसीसी की ओर से इस बैठक में डॉ.अनिल कुमार पूनिया, निदेशक, डॉ.राकेश रंजन, समिति सदस्य सचिव तथा सभी वैज्ञानिकों ने सहभागिता निभाई।

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निदेशक डॉ.अनिल कुमार पूनिया ने एनआरसीसी द्वारा प्राप्त अनुसंधान उपलब्धियों एवं चल रही गतिविधियों के संबंध में समिति को अवगत करवाते हुए अनुसंधान के क्षेत्र में केन्द्र के नवाचारों को सदन के समक्ष रखा तथा गतिशील अनुसंधानों के और अधिक बेहतर कार्यान्वयन, सही दिशा व अपेक्षित परिणाम के लिए समिति से उचित मार्गदर्शन की अपेक्षा जताई ।

आरएसी समिति के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर सिंह ने कहा कि ऊँट प्रजाति हमें हमारे पूर्वजों से विरासत के रूप में प्राप्त हुई है। अतः इस धरोहर का संरक्षण करते हुए, बदलते परिवेश में ऊँट पालन को आगे बढ़ाने तथा इस व्यवसाय के माध्यम से ऊँट पालकों/किसानों को आर्थिक प्रतिफल सुनिश्चित करने पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है। उन्होंने इसके लिए ऊँट पालन का नवीन मॉडल विकसित करने तथा कैमल डेयरी के व्यवसायीकरण पर विशेष बल दिया। डॉ. सिंह ने एनआरसीसी के उच्च स्तरीय प्रकाशनों, राजस्व अर्जन, वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे नवाचारी अनुसंधान कार्यों एवं प्रभावी प्रबंधन की सराहना की। साथ ही उन्होंने ऊँटों की आबादी में वृद्धि, ऊँट पालकों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने, डेयरी व्यवसाय को प्रोत्साहित करने हेतु नीतिगत रूप से इसे विकसित करने, न्यूट्रास्यूटिकल फूड के रूप में इसे विकसित करने तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ समन्वय से फील्ड-स्तर पर ठोस प्रयास करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

समिति सदस्‍य डॉ. रणधीर सिंह ने कहा कि घटती ऊँट आबादी के पुनर्स्थापन में योजनाओं की भूमिका पर कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने क्षमता संवर्धन, ऊँट के चमड़े एवं बाल से बने उत्पादों के प्रचार तथा पालन-पोषण एवं परंपरागत ज्ञान के दस्‍तावेजीकरण पर बल दिया। किसान प्रतिनिधि श्री रणवीर सिंह भादू ने कहा कि एनआरसीसी अनुसंधान की दिशा में बेहतर कार्य कर रहा है, उन्होंने उष्ट्र उत्पादों को जन-सामान्य एवं बाजार में लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता जताई। डॉ. आशिष कुमार सामंता ने एनआरसीसी द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की निरंतरता एवं नस्‍ल पंजीकरण की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया ।

डॉ. प्रमोद कुमार राउत ने वैज्ञानिकों को परियोजना संबंधित अनुसंधान कार्यों के बेहतर परिणामों के लिए उपयोगी सुझाव में कहा कि भारवाहकता तथा सतत चराई मॉडल के विकास की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए। डॉ. त्रिभुवन शर्मा ने ऊँटों की घटती आबादी के विभिन्‍न कारणों का उल्‍लेख करते हुए इन पर गहन अनुसंधान हेतु सभी के समन्वित प्रयासों की आवश्‍यकता जताई। डॉ.वी.पी.सिंह ने वैज्ञानिकों को अनुसंधान कार्यों के दौरान अधिक सेम्‍पल्‍स के आधार पर कार्य करने तथा ऊँटों में पाई जाने वाली थनैला बीमारी के इलाज हेतु सभी विशेषज्ञों के साथ मिलकर कार्य करने की बात कही। डॉ.एस.वैद्यनाथन ने भी अनुसंधान कार्यों को वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतारने के लिए उपयोगी सुझाव दिए तथा एनआरसीसी में ऊँटों की सभी नस्‍लों के रखरखाव की बात कही।

बैठक के समापन पर केन्‍द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.राकेश रंजन, समिति सदस्य सचिव ने अध्‍यक्ष व सभी समिति सदस्‍यों व वैज्ञानिकों के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया ।

 

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