कोटड़ी गांव में एनआरसीसी द्वारा पशु स्वास्थ्य शिविर व संवाद आयोजित
कोटड़ी गांव में एनआरसीसी द्वारा पशु स्वास्थ्य शिविर व संवाद आयोजित


पशुपालक अपनाएं वैज्ञानिक प्रबंधन


बीकानेर, 11 फ़रवरी । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC), बीकानेर द्वारा बुधवार को बीकानेर के जोड़बीड़ क्षेत्र के ग्राम कोटड़ी में ‘अनुसूचित जाति उप-योजना’ (SCSP) के अंतर्गत एक दिवसीय पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक संवाद का सफल आयोजन किया गया। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में आयोजित इस शिविर के माध्यम से 100 से अधिक महिला व पुरुष पशुपालकों को पशुपालन की आधुनिक तकनीकों से रूबरू करवाया गया।


शिविर के दौरान केंद्र के वैज्ञानिकों ने पशुपालकों को आय बढ़ाने के विभिन्न गुर सिखाए। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बसंती ज्योत्सना ने ऊँटनी के दूध के औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य पर चर्चा करते हुए बताया कि इसे एक लाभकारी दुग्ध उद्यम के रूप में विकसित किया जा सकता है। वहीं, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका गौतम ने संतुलित पशु पोषण और उन्नत चारा उत्पादन तकनीकों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हरे चारे की वैज्ञानिक खेती और पशु आहार में सुधार से सीधे तौर पर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।
उद्यमिता और पर्यटन से बढ़ेगी ऊँट पालकों की आय
केंद्र निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों के माध्यम से अपने संदेश में कहा कि ऊँटनी के दूध और उसके मूल्य संवर्धित उत्पादों (Value Added Products) की बाजार में भारी मांग है। उन्होंने प्रदेश में ऊँट दुग्ध आधारित उद्यमिता और पर्यटन के क्षेत्र में ऊँटों की बढ़ती भूमिका को आय का एक सशक्त साधन बताया। उन्होंने पशुपालकों से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान भी किया।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. काशीनाथ ने पशुओं में होने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम हेतु नियमित टीकाकरण और कृमिनाशक दवाओं के महत्व को समझाया। एस.सी.एस.पी. योजना के नोडल अधिकारी श्री मनजीत सिंह ने उप-योजना के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र निरंतर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार गतिविधियां चला रहा है।
इनपुट किट और स्कूली बच्चों को प्रोत्साहन
शिविर में सामाजिक सहभागिता और पशुधन संरक्षण को प्रोत्साहन देने हेतु निम्नलिखित वितरण कार्य किए गए:
- पशुपालकों हेतु: 100 से अधिक पशुपालकों को मिनरल मिक्सचर, पशु दाना और औषधीय किट निःशुल्क प्रदान किए गए।
- छात्र-छात्राओं हेतु: राजकीय विद्यालय के 72 छात्र-छात्राओं को स्कूल किट वितरित कर प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में कृषक-वैज्ञानिक संवाद आयोजित हुआ, जिसमें पशुपालकों ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इस अवसर पर केंद्र के श्री डिंपल सहित अन्य कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहा।
