ईरान-इज़राइल युद्ध की भेंट चढ़ा नागौर का दलीप सिंह, ड्यूटी बदलते ही जहाज पर गिरी मिसाइल, शव की तलाश जारी
नागौर जिले के खींवताना गांव निवासी दलीप सिंह तंव


ओमान पोर्ट , 4 मार्च। मिडिल ईस्ट में जारी ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच तनाव की भारी कीमत राजस्थान के एक परिवार को चुकानी पड़ी है। ओमान के खासब पोर्ट (Khasab Port) पर खड़े मर्चेंट नेवी के जहाज ‘स्काइलाइट क्रूड ऑयल’ पर हुए ईरानी मिसाइल हमले में नागौर जिले के खींवताना गांव निवासी दलीप सिंह तंवर की दुखद मृत्यु हो गई। इस हादसे की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दलीप के ही पड़ोसी गांव का साथी सुनील पूनिया इस हमले में बाल-बाल बच गया, क्योंकि हमले से कुछ देर पहले ही उनकी ड्यूटी समाप्त हुई थी।


घटनाक्रम के अनुसार, 1 मार्च को जब यह जहाज सर्विस के लिए पोर्ट पर खड़ा था, तब ईरान की ओर से दागी गई एक मिसाइल सीधे शिप के अगले हिस्से पर आ गिरी। उस समय दलीप सिंह तंवर बिहार निवासी पायलट आशीष कुमार के साथ ड्यूटी पर तैनात थे। सुनील पूनिया ने अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद दलीप को जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसके कुछ ही समय बाद यह भीषण धमाका हुआ। जहां आशीष कुमार का शव बरामद कर लिया गया है, वहीं दलीप सिंह का शव अभी भी लापता है, जिससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई है।


दलीप सिंह तंवर अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़े थे और परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। लगभग एक साल की लंबी ड्यूटी के बाद वे घर आए थे और छह महीने परिवार के साथ बिताकर बीते 22 जनवरी को ही काम पर लौटे थे। 23 जनवरी को उनका जहाज मुंबई से ओमान के लिए रवाना हुआ था। हादसे से महज एक दिन पहले 28 फरवरी को उनकी परिवार से आखिरी बार बात हुई थी, जिसमें किसी अनहोनी का अंदेशा तक नहीं था।
दलीप की मौत की खबर मिलते ही नागौर के खींवताना गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। ग्रामीण और परिजन अब केंद्र सरकार से दलीप के शव को जल्द से जल्द खोजने और सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं। युद्ध की विभीषिका के बीच मर्चेंट नेवी में कार्यरत भारतीय युवाओं की सुरक्षा को लेकर भी अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
