बीकानेर में ईडी का छापा

बीकानेर में ईडी का छापा
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quicjZaps 15 sept 2025

कोयला गली स्थित ‘मोहनलाल आशीष कुमार अग्रवाल’ के ऑफिस पहुंची प्रवर्तन निदेशालय की टीम

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बीकानेर, 3 जून । आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के ‘लड्डू प्रसादम’ में इस्तेमाल होने वाले घी की मिलावट और टेंडर हेरफेर के मामले में जांच की आंच अब राजस्थान के बीकानेर तक पहुंच गई है। बुधवार सुबह केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने बीकानेर के प्रमुख घी व्यापारी के कार्यालय पर अचानक छापेमारी की। जानकारी के अनुसार, इस फर्म ने तिरुपति मंदिर में प्रसाद निर्माण के लिए घी की भारी खेप सप्लाई की थी, जिसके वित्तीय लेन-देन और टेंडर्स को लेकर ईडी द्वारा यह बड़ी कार्रवाई की जा रही है।

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सुबह-सुबह कोयला गली पहुंची केंद्रीय टीम, स्थानीय पुलिस को लौटाया

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ईडी की टीम बुधवार अलसुबह बीकानेर के व्यापारिक क्षेत्र कोटगेट के पास स्थित कोयला गली पहुंची। टीम ने यहां स्थापित प्रसिद्ध घी व्यापारिक फर्म ‘मोहनलाल आशीष कुमार अग्रवाल’ के मुख्य कार्यालय को अपने नियंत्रण में ले लिया और प्रवेश व निकास द्वारों को बंद कर दिया।

केंद्रीय एजेंसी की इस औचक कार्रवाई की भनक जब स्थानीय कोटगेट थाना पुलिस को लगी, तो पुलिस टीम भी वस्तुस्थिति की जानकारी लेने मौके पर पहुंची। हालांकि, ईडी के उच्च अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस को यह कहते हुए मौके से वापस लौटा दिया कि यह उनकी केंद्रीय स्तर की जांच का हिस्सा है और वर्तमान में उन्हें स्थानीय पुलिस बल के सहयोग की आवश्यकता नहीं है।

साढ़े चार महीने पहले इनकम टैक्स की भी हुई थी कार्रवाई
बीकानेर के इस बड़े कारोबारी समूह पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का यह दूसरा बड़ा शिकंजा है। इससे पूर्व इसी साल की शुरुआत में, यानी करीब साढ़े चार महीने पहले 15 जनवरी 2026 को आयकर विभाग (Income Tax) की टीमों ने इस फर्म के विभिन्न ठिकानों पर व्यापक सर्वे और रेड की कार्रवाई की थी। आयकर छापे के बाद अब ईडी की इस एंट्री से स्थानीय व्यापारिक गलियारों और सर्राफा व घी बाजार में भारी हड़कंप मच गया है।

समझिए क्या है पूरा मामला और बीकानेर से कनेक्शन?
यह पूरा विवाद वर्ष 2022 से शुरू होता है, जब तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के विश्वप्रसिद्ध लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता और उसमें पशु चर्बी व अन्य मिलावट की गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने इसकी जांच शुरू की थी।

उत्तराखंड की फर्म हुई थी ब्लैकलिस्ट: प्रारंभिक जांच के बाद टीटीडी (TTD) प्रबंधन ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध ‘भोलेबाबा डेयरी’ को घी में मिलावट का दोषी पाते हुए पूरी तरह ब्लैकलिस्ट (प्रतिबंधित) कर दिया था।

मुखौटा कंपनियों के जरिए टेंडर का खेल: आरोप है कि ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद डेयरी मालिकों ने राजनीतिक रसूख और सांठगांठ के चलते अन्य राज्यों की अलग-अलग डेयरी फर्मों के नाम पर तिरुपति मंदिर के नए टेंडर हासिल कर लिए और पिछले दरवाजे से घी की सप्लाई जारी रखी।

जांच के घेरे में आई फर्म्स: इन मुखौटा फर्मों में मुख्य रूप से वैष्णवी डेयरी (तिरुपति), माल गंगा डेयरी (उत्तर प्रदेश) और एआर डेयरी फूड्स (तमिलनाडु) शामिल हैं। यह पूरा घटनाक्रम टीटीडी के तत्कालीन चेयरमैन वाई.एस. सुब्बा रेड्डी के कार्यकाल के दौरान हुआ था। बीकानेर की फर्म ‘मोहनलाल आशीष कुमार अग्रवाल’ द्वारा इन्हीं में से कुछ कड़ियों के जरिए प्रसादम के लिए घी की री-सप्लाई या वित्तीय फंडिंग किए जाने की बात सामने आ रही है, जिसकी कड़ियां जोड़ने ईडी बीकानेर पहुंची है।

300 साल से अधिक पुराना है तिरुपति लड्डू का गौरवमयी इतिहास
तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए लड्डू केवल एक मिष्ठान नहीं, बल्कि अगाध श्रद्धा का प्रतीक है।

1715 से जारी है परंपरा: भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में रोजाना 3.5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को लड्डू का प्रसाद वितरित किया जाता है। यह अनूठी परंपरा पिछले 300 से अधिक वर्षों (सन 1715) से लगातार बिना रुके चली आ रही है।

‘पोट्टु’ रसोई का रहस्य: यह दिव्य प्रसाद मंदिर परिसर के भीतर स्थित एक बेहद सुरक्षित और पारंपरिक रसोई में तैयार होता है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘पोट्टु’ कहा जाता है। यहां केवल पारंपरिक समुदाय के विशेष कारीगर ही प्रवेश कर सकते हैं, जो पीढ़ियों से इस पवित्र कला को आगे बढ़ा रहे हैं। तैयार लड्डुओं को भक्तों में बांटने से पहले सबसे पहले भगवान वेंकटेश्वर को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है।

‘दित्तम’ पद्धति से तय होती है रेसिपी
तिरुपति लड्डू को बनाने की कड़े नियमों वाली वैज्ञानिक व पारंपरिक प्रक्रिया को ‘दित्तम’ कहा जाता है। इसके तहत लड्डू में उपयोग होने वाली प्रत्येक सामग्री (जैसे बेसन, शुद्ध घी, काजू, चीनी) की मात्रा और अनुपात पहले से ही बेहद कड़ाई से निर्धारित होता है, जिसमें रत्ती भर भी बदलाव की अनुमति नहीं होती।

इतने लंबे इतिहास में इस गुप्त रेसिपी में केवल छह बार ही आंशिक संशोधन किए गए हैं। शुरुआत में ये लड्डू केवल बेसन और गुड़ की चाशनी से बनाए जाते थे ताकि वे लंबी यात्राओं के दौरान खराब न हों। बाद में समय के साथ इसका स्वाद, सुगंध और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें उच्च गुणवत्ता वाले बादाम, काजू, इलायची और किशमिश का मिश्रण भी किया जाने लगा। इसी अति-विशिष्ट घी की शुद्धता के मानक में हुए कथित घोटाले को लेकर अब देशव्यापी जांच चल रही है।

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