श्री जैन पब्लिक स्कूल में दादी-नानी के संग मना अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
श्री जैन पब्लिक स्कूल में दादी-नानी के संग मना अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस


बीकानेर, 7 मार्च । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में श्री जैन पब्लिक स्कूल (SJPS), बीकानेर में एक अनूठा और प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। “नारी शक्ति” के सम्मान में आयोजित इस उत्सव की विशेषता यह रही कि इसमें विद्यार्थियों की दादी और नानियों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया, जिससे विद्यालय परिसर दो पीढ़ियों के प्यार और अनुभवों से सराबोर हो उठा।


कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और वंदना के साथ हुआ। वरिष्ठ महिलाओं के सम्मान में आयोजित इस समारोह में मनोरंजन और ज्ञान का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। दादी-नानियों के लिए म्यूजिकल चेयर, पोस्टर मेकिंग और कई रोचक खेल गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें उन्होंने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव साझा किए, जिन्हें सुनकर विद्यार्थी और शिक्षक भावविभोर हो गए।


आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कारों का पोषण
विद्यालय भ्रमण के दौरान दादी-नानियों ने अपने पोते-पोतियों की शिक्षा प्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि श्री जैन पब्लिक स्कूल न केवल किताबी ज्ञान दे रहा है, बल्कि नई पीढ़ी में भारतीय संस्कारों और नैतिक मूल्यों को भी मजबूती से रोपित कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यहाँ से शिक्षित होकर निकलने वाले बच्चे भविष्य में देश के आदर्श नागरिक बनेंगे।
अनुभवों की पाठशाला हैं दादी-नानी: प्राचार्या
प्राचार्या श्रीमती रूपश्री सिपानी ने उपस्थित बुजुर्ग महिलाओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि परिवार में दादी-नानी की भूमिका एक मार्गदर्शक की होती है। उन्होंने आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ अधिक समय बिताएं और अपने संस्कारों की विरासत उन्हें सौंपें। विद्यालय के अध्यक्ष विजय कुमार कोचर, सचिव सीए माणक कोचर और सीईओ श्रीमती सीमा जैन ने इस आयोजन को पीढ़ियों के बीच के फासले को पाटने वाला बताया और सभी को स्वस्थ जीवन की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के अंत में सभी दादी-नानियों ने इस सम्मान के लिए विद्यालय प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महिला दिवस को इस नवीन सोच के साथ मनाने का यह अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय रहेगा, जिसने उन्हें जीवन के इस पड़ाव पर भी सक्रिय और सम्मानित महसूस कराया है।
