खेजड़ी संरक्षण कानून, सरकार विशेषज्ञों और आंदोलनकारियों की राय ले, वरना कानून होगा लचर – कॉमरेड जेठाराम लाखूसर
खेजड़ी संरक्षण कानून, सरकार विशेषज्ञों और आंदोलनकारियों की राय ले



बीकानेर, 12 मार्च । राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए चल रहा ‘पर्यावरण संघर्ष समिति’ का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बीकानेर में धरने के 238वें दिन और खेजड़ला रोही (नोखा दईया) में 593वें दिन भी पर्यावरण प्रेमियों का जोश कम नहीं हुआ। धरने को संबोधित करते हुए वरिष्ठ आंदोलनकारी कॉमरेड जेठाराम लाखूसर ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि खेजड़ी संरक्षण कानून बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और विशेषज्ञता का होना अनिवार्य है।


प्रमुख सुझाव और आपत्तियां
कॉमरेड लाखूसर ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:


विशेषज्ञों की भागीदारी: कानून का मसौदा तैयार करने से पहले पर्यावरण विशेषज्ञों, वनस्पति शास्त्रियों और अनुभवी पर्यावरणविदों की राय ली जानी चाहिए।
मौके का मुआयना: जिन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खेजड़ियां काटी गई हैं, सरकार वहां का दौरा कर पर्यावरण को हुए वास्तविक नुकसान का जायजा ले।
समिति में प्रतिनिधित्व: लाखूसर ने आरोप लगाया कि सरकार ने संरक्षण कानून के लिए बनाई गई कमेटी में ‘पर्यावरण संघर्ष समिति’ के किसी भी सदस्य या प्रमुख आंदोलनकारी को शामिल नहीं किया है, जो सरकार की “लचर कानून” बनाने की मंशा को दर्शाता है।
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
धरना स्थल पर आज विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों के लोग एकजुट नजर आए। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के सुझावों को कानून में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक खेजड़ी का अवैध कटान रुकना मुश्किल है।
उपस्थित गणमान्य जन
आज के धरने में रामगोपाल बिश्नोई, शिवदान मेघवाल, शान्तिलाल सेठिया, हनुमाना राम बेनीवाल, ताहिर खान, हुसैन हिन्दुस्तानी, और राजाराम सारस्वत सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि खेजड़ी संरक्षण के लिए सख्त और प्रभावी कानून बनाया जाए।
