केन्द्रीय विश्वविद्यालय में राजस्थानी संकाय खोलने की मांग
केन्द्रीय विश्वविद्यालय में राजस्थानी संकाय खोलने की मांग


- कमल रंगा ने जताई राजस्थानी भाषा की अनदेखी पर चिंता
बीकानेर, 15 मार्च। किशनगढ़ स्थित राजस्थान के एकमात्र केन्द्रीय विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का संकाय खोलने की मांग तेज हो गई है। राजस्थानी युवा लेखक संघ के प्रदेशाध्यक्ष और राजस्थानी मान्यता आंदोलन के प्रणेता कमल रंगा ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार द्वारा प्रदेश की मातृभाषा की अनदेखी किए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया है।


मराठी को प्राथमिकता, राजस्थानी की उपेक्षा क्यों?
कमल रंगा ने बताया कि उन्हें ज्ञात हुआ है कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय में मराठी भाषा का संकाय खोलने का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस विश्वविद्यालय में सर्वाधिक छात्र राजस्थान के हैं और जिनकी मातृभाषा राजस्थानी है, वहां प्रदेश की अपनी समृद्ध भाषा का संकाय न होना बेहद दुखद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य भारतीय भाषाओं के संकाय खोलने पर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन प्राथमिकता राजस्थानी को मिलनी चाहिए।


राजस्थानी भाषा: वैज्ञानिक और साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध
रंगा ने राजस्थानी भाषा की मजबूती के पक्ष में कई महत्वपूर्ण तर्क दिए। शैक्षणिक स्थिति: प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में राजस्थानी विषय में सैकड़ों छात्र एम.ए. और पीएचडी कर रहे हैं। वैज्ञानिक मानदंड: राजस्थानी भाषा वैज्ञानिक रूप से पूर्ण है, जिसका अपना विशाल शब्दकोश, व्याकरण और देवनागरी लिपि है।
साहित्यिक विरासत: इस भाषा का प्राचीन और आधुनिक साहित्य अत्यंत समृद्ध है, जो वैश्विक स्तर पर पहचान रखता है।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र
इस संवेदनशील विषय को लेकर राजस्थानी समर्थकों, साहित्यकारों और छात्र-छात्राओं में व्याप्त आक्रोश को देखते हुए कमल रंगा ने राज्य के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और संबंधित मंत्रालय को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि राजस्थानी भाषा को उसका उचित मान-सम्मान दिलाते हुए केन्द्रीय विश्वविद्यालय में शीघ्र राजस्थानी संकाय खुलवाने के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।
