सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, MCX पर औंधे मुंह गिरे दाम; जानें गिरावट के 3 बड़े कारण

सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट
shreecreates
quicjZaps 15 sept 2025

नई दिल्ली/बीकानेर, 19 मार्च । वैश्विक बाजारों में मची हलचल के बीच आज भारतीय वायदा बाजार (MCX) में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कल तक रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ रही इन कीमती धातुओं के दाम आज दोपहर होते-होते धराशायी हो गए।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

आज के ताजा भाव (दोपहर 1:00 बजे तक)
सोना (Gold): MCX पर सोना 3,887 रुपये की भारी गिरावट के साथ 1,49,318 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया।
चांदी (Silver): चांदी में गिरावट और भी डरावनी रही, जहाँ यह 12,738 रुपये टूटकर 2,35,456 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है।

pop ronak

गिरावट के 3 मुख्य कारण
1. अमेरिकी फेड रिजर्व का सख्त रुख
अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed Reserve) ने अपनी हालिया बैठक में ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखा है। हालांकि, फेड चेयरपर्सन ने संकेत दिया है कि महंगाई दर अभी भी लक्ष्य से ऊपर है, इसलिए ब्याज दरों में कटौती की संभावना फिलहाल बहुत कम है। ऊंची ब्याज दरें गैर-उपज वाली संपत्तियों जैसे सोने के आकर्षण को कम कर देती हैं।

2. मजबूत डॉलर इंडेक्स
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक निवेशकों ने ‘सुरक्षित निवेश’ के रूप में अमेरिकी डॉलर को प्राथमिकता दी है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने पर दबाव बढ़ा है, जिससे घरेलू बाजार में भी कीमतें नीचे आई हैं।

3. लिक्विडिटी और मार्जिन कॉल
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ($110+ प्रति बैरल) के कारण शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई है। ऐसे में बड़े निवेशकों और संस्थागत ट्रेडर्स ने अपने घाटे को पूरा करने (Margin Calls) के लिए सोने और चांदी की जमकर बिकवाली की है, ताकि वे नकदी जुटा सकें।

बाजार विशेषज्ञों की सलाह
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में बुलियन मार्केट में ‘अत्यधिक अस्थिरता’ (High Volatility) बनी हुई है। सोने और चांदी ने अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ दिए हैं।

निवेशकों को सलाह है कि वे फिलहाल नई खरीदारी से बचें। डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव के चलते इस पूरे हफ्ते कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। बाजार में स्थिरता आने के बाद ही लॉन्ग-टर्म निवेश के बारे में सोचना उचित होगा।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *