NRCC में POSH एक्ट पर कार्यशाला, कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा और सम्मान के लिए ‘शून्य सहिष्णुता’ का संकल्प
NRCC में POSH एक्ट पर कार्यशाला, कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा और सम्मान के लिए 'शून्य सहिष्णुता' का संकल्प


बीकानेर, 19 मार्च । भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC), बीकानेर में आज ‘प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट अधिनियम (POSH Act) की अनुपालना’ विषय पर एक दिवसीय महत्वपूर्ण कार्यशाला-सह-जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुआ। केंद्र के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा से समझौता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


डिजिटल व्यवहार और ऑनलाइन कार्य पर भी लागू है कानून
राजस्थान उच्च न्यायालय की अधिवक्ता श्रीमती सुमन शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में अधिनियम की कानूनी बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि:


विस्तृत दायरा: कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न केवल शारीरिक नहीं, बल्कि अनुचित शब्द, इशारे और डिजिटल माध्यमों (WhatsApp, Email आदि) से किया गया अशोभनीय व्यवहार भी दंडनीय अपराध है।
WfH (Work From Home): यह अधिनियम उन महिलाओं पर भी समान रूप से लागू होता है जो घर से ऑनलाइन कार्य कर रही हैं।
शिकायत प्रक्रिया: पीड़िता घटना के 90 दिनों के भीतर आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में शिकायत दर्ज करा सकती है। उन्होंने बताया कि 1997 के ‘विशाखा दिशा-निर्देशों’ को मजबूती देने के लिए 2013 में यह कानून बनाया गया था।
निदेशक का संदेश: घर जैसी संवेदनशीलता कार्यस्थल पर भी हो
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने नैतिक मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक आदर्श समाज और प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण के लिए महिलाओं का निर्भीक होना अनिवार्य है। डॉ. पूनिया ने पुरुष कर्मचारियों से आह्वान किया कि कार्यस्थल पर भी वही शिष्ट और गरिमापूर्ण व्यवहार होना चाहिए, जैसा वे अपने घर में महिलाओं के साथ करते हैं। उन्होंने संस्थान में ‘परस्पर सम्मान की संस्कृति’ को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
10 से अधिक कर्मचारी वाले संस्थानों में ICC अनिवार्य
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री अखिल ठुकराल ने प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि कानूनन जिस भी संस्थान में 10 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, वहां आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन अनिवार्य है। वहीं, केंद्र की महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. बसंती ज्योत्सना ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य कर्मचारियों को उनके अधिकारों और दायित्वों के प्रति जागरूक करना था। समारोह के अंत में एक विशेष प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने कर्मचारियों की कानूनी शंकाओं का समाधान किया।
