अभय जैन ग्रंथालय की कॉपर प्लेट पांडुलिपियों की हुई वैश्विक सराहना
अभय जैन ग्रंथालय की कॉपर प्लेट पांडुलिपियों की हुई वैश्विक सराहना


- पीएम मोदी की ‘मन की बात’ में बीकानेर का गौरव
बीकानेर, 30 मार्च 2026। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी बीकानेर के नाम रविवार को एक और स्वर्णिम उपलब्धि जुड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बीकानेर स्थित अभय जैन ग्रंथालय और वहां संरक्षित दुर्लभ कॉपर प्लेट (ताम्रपत्र) पांडुलिपियों का विशेष उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने देश की ज्ञान परंपरा को सहेजने के इस भगीरथ प्रयास की सराहना करते हुए इसे ‘भारतं ज्ञान मिशन’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने देशभर में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के महत्व को भी रेखांकित किया।


प्रधानमंत्री ने ‘भारतं ज्ञान मिशन’ के तहत देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वे और सूचीबद्ध करने के कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।


पांडुलिपि सर्वेक्षण: राजस्थान बना देश का अग्रणी राज्य
प्रधानमंत्री ने देशव्यापी पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि राजस्थान में अब तक साढ़े बारह लाख (12.5 लाख) से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वे पूरा कर उन्हें मिशन के पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इन धरोहरों का डिजिटलीकरण न केवल हमारी विरासत को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को भारत के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है।
क्यों खास हैं अभय जैन ग्रंथालय की कॉपर प्लेट्स?
अभय जैन ग्रंथालय में संरक्षित तांबे की पट्टिकाओं (Copper Plates) पर लिखे अभिलेख ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अमूल्य हैं:
ऐतिहासिक साक्ष्य: इनमें प्राचीन काल के राजकीय दानपत्र, प्रशासनिक व्यवस्थाएं और तत्कालीन सामाजिक नियमों का विवरण दर्ज है।
धार्मिक दर्शन: इन प्लेटों पर जैन धर्म के आगम, सिद्धांत, तीर्थंकरों के जीवन चरित्र और प्राचीन आचार्यों की शिक्षाएं उकेरी गई हैं।
शोध का आधार: ये पांडुलिपियां इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए प्राथमिक स्रोत (Primary Source) के रूप में कार्य करती हैं।
दशकों की साधना का परिणाम
ग्रंथालय के निदेशक ऋषभ नाहटा ने बताया कि इस विशाल संग्रह की नींव प्रख्यात विद्वान अगरचंद नाहटा ने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के संरक्षण के संकल्प के साथ रखी थी। वर्षों के समर्पण और कठिन परिश्रम से तैयार यह ग्रंथालय अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से पूरी दुनिया के लिए एक ‘मॉडल’ के रूप में उभर रहा है।
किसने रखी थी अभय जैन ग्रंथालय की नींव
अभय जैन ग्रंथालय की नींव अगरचंद नाहटा और भंवरलाल नाहटा ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से रखी थी. आज उसी संकल्प को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. ज्ञान भारतम् मिशन के तहत यह ग्रंथालय न केवल अपने संग्रह का संरक्षण कर रहा है, बल्कि अन्य निजी संग्रहों और संस्थानों की पांडुलिपियों को भी संरक्षित करने का संकल्प लेकर एक व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुका है.
भारत सरकार की इस पहल के तहत देशभर में लगभग एक करोड़ पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और संरक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से इन्हें आमजन के लिए सुलभ बनाने का प्रयास भारत की ज्ञान परंपरा को नई पहचान दे रहा है.
बीकानेर का अभय जैन ग्रंथालय इस राष्ट्रीय अभियान में एक अग्रणी केंद्र बनकर उभरा है, जहां अतीत की विरासत और भविष्य की तकनीक मिलकर ज्ञान का नया अध्याय लिख रही हैं. यह पहल न केवल धरोहर का संरक्षण है, बल्कि भारत के बौद्धिक पुनर्जागरण की आधारशिला भी है. जहां ‘भविष्य के लिए अतीत का संरक्षण’ एक सजीव संकल्प बन चुका है.
मिशन में इन विशेषज्ञों का रहा विशेष योगदान
राजस्थान पांडुलिपि मिशन को सफल बनाने और बीकानेर के इस खजाने को दुनिया के सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली टीम में शामिल हैं. डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा (समन्वयक, राजस्थान पांडुलिपि मिशन), ऋषभ नाहटा (निदेशक, अभय जैन ग्रंथालय), मोहित बिस्सा (सर्वेक्षण अधिकारी), जयप्रकाश शर्मा, लव कुमार देरासरी, गौरव आचार्य और लक्ष्मीकांत उपाध्याय।


