हावड़ा लिंक ट्रेन के फेरे घटने से कनेक्टिविटी पर ब्रेक, बीकानेर से यूपी-बिहार के यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

हावड़ा लिंक ट्रेन के फेरे घटने से कनेक्टिविटी पर ब्रेक, बीकानेर से यूपी-बिहार के यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
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quicjZaps 15 sept 2025
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बीकानेर,14 अप्रैल। बीकानेर से उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली हावड़ा लिंक एक्सप्रेस की रफ्तार कोरोना काल के बाद से पटरी पर नहीं लौट पाई है। कभी रोजाना (दैनिक) चलने वाली यह महत्वपूर्ण ट्रेन अब सप्ताह में केवल तीन दिन ही संचालित हो रही है। रेल सेवा में आई इस कटौती ने हजारों यात्रियों, प्रवासियों और व्यापारियों के लिए सफर को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

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उद्योग और व्यापार पर सीधा असर

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बीकानेर का नमकीन, कपड़ा, ऊन और खनन उद्योग काफी हद तक उत्तर प्रदेश और बिहार के कुशल कारीगरों एवं श्रमिकों पर निर्भर है। ट्रेन के प्रतिदिन संचालित न होने से:

श्रमिकों की परेशानी: हजारों प्रवासी मजदूरों को अपने घर आने-जाने के लिए कंफर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है।

व्यापारिक संबंध: आगरा, कानपुर, लखनऊ और इलाहाबाद जैसे शहरों से व्यापारिक जुड़ाव होने के कारण व्यापारियों को आवागमन में भारी असुविधा हो रही है।

आर्थिक बोझ: सीधी ट्रेन न होने के कारण यात्रियों को निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो न केवल महंगी हैं बल्कि समय भी अधिक लेती हैं।

टुकड़ों में सफर करने की मजबूरी

वर्तमान में आगरा, इटावा, फिरोजाबाद, टूंडला, कानपुर, लखनऊ और मुगलसराय जाने वाले यात्रियों को एक ट्रेन की सीधी सेवा न मिलने के कारण अलग-अलग ट्रेनों को बदलकर टुकड़ों में यात्रा करनी पड़ रही है। इससे समय की बर्बादी के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

रेलवे प्रशासन से प्रतिदिन चलाने की मांग

इस गंभीर समस्या को देखते हुए अखिल भारतीय सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैप्टन डॉ. ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मंडल रेल प्रबंधक (DRM) बीकानेर के माध्यम से निम्नलिखित स्तरों पर इस ट्रेन को पुनः दैनिक करने की मांग उठाई है।

केंद्रीय मंत्री: क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल। रेल मंत्रालय: रेल मंत्री और उच्चाधिकारियों को ज्ञापन। जनप्रतिनिधि: संभाग के सभी विधायकों और रेल कर्मचारी यूनियनों से समर्थन मांगा गया है। यात्रियों और संगठनों का कहना है कि जब स्थितियां अब पूरी तरह सामान्य हैं, तो रेलवे को इस महत्वपूर्ण रूट की कनेक्टिविटी को बहाल कर आम जनता को राहत देनी चाहिए।

 

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